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ग़ज़ल / बह्र -22/22/22/22

जीने में अब मजा कहाँ है,
खुशियों का सिलसिला कहाँ है ।
बारिश कोसों दूर हुई अब
जल का बादल गया कहाँ है ।
जो हैं हिंसा के सौदागर
उनको मिलती सज़ा कहाँ है ।
रहबर करते वादे बेहद ,
कोई पूरा हुआ कहाँ है ।
माँ है उनकी जीवित अब तक
घर का हिस्सा हुआ कहाँ है
भूल चुका है वो तो ये भी,
भाई उसका बसा कहाँ है ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Views: 683

Comment

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Comment by Mohammed Arif on July 10, 2017 at 2:06pm
बहुत-बहुत आभार आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी ।
Comment by Shyam Narain Verma on July 10, 2017 at 12:17pm
बहुत खूब ॥ आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥

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