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गणतंत्र हमारा-26जनवरी विशेष ग़ज़ल

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वैविध्य से परिपूर्ण है गणतंत्र हमारा।
हम सब से ही सम्पूर्ण है गणतन्त्र हमारा।।

समता के अनुच्छेद के पालन बिना सुनो।
हर हाल में अपूर्ण है गणतन्त्र हमारा।।

अभिव्यक्ति का अधिकार सभी को है मित्रवर।
पर पहले महत्वपूर्ण है गणतन्त्र हमारा।।

धर्मों का यहाँ संगम अद्भुत है ये धरा।
समरसता से अभिपूर्ण है गणतन्त्र हमारा।।

संसार के क्षितिज पे दमकता नक्षत्र है।
आदित्य सा प्रतूर्ण है गणतन्त्र हमारा।।

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Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 29, 2017 at 11:15am
आदरणीय मोहम्मद आरिफ भाई सादर धन्यवाद
Comment by Mohammed Arif on January 27, 2017 at 8:37pm
आदरणीय पंकजजी, गणतंत्रीय मूल्यों को, महत्व को रेखांकित करती रचना के लिए बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 26, 2017 at 12:28am
आदरणीय सुरेद कल्याण सर बहुत बहुत आभार
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 26, 2017 at 12:28am
आदरणीय आशुतोष सर सादर आभार
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 26, 2017 at 12:28am
आदरणीय मिथिलेश सर आपके आदेश का अनुपालन अति शीघ्र होगा
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on January 25, 2017 at 7:29pm
आदरणीय पंकज जी देशभक्तिपूर्ण सुन्दर गजल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।सादर ।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 25, 2017 at 7:09pm
आदरणीय पंकज जी गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इस ग़ज़ल और गणतंत्र दिवस की ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ सादर
Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 25, 2017 at 7:09pm
आदरणीय पंकज जी गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इस ग़ज़ल और गणतंत्र दिवस की ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 25, 2017 at 7:01pm

आदरणीय पंकज जी, 

1. आपने 'मौलिक व अप्रकाशित' नहीं लिखा है.

2. मंच पर आप सतत रचनाएँ प्रस्तुत कर रहे हैं किन्तु यह भी अवश्य है कि अन्य रचनाकारों की प्रस्तुतियों को आपकी बहुत दिनों से प्रतीक्षा है. आप उन्हें भी अपनी प्रतिक्रियाओं से लाभान्वित करेंगे ऐसी आशा है. सादर 

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 25, 2017 at 2:18pm
आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह सर बहुत बहुत आभार

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