For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल बह्र फेलुन×5+फा


शैतानों की देखो दावत करता है
पापी है पर जन्नत जन्नत करता है ।
*******

कोई तुझे न देखे अच्छी नज़रों से
क्यों तू ऐसी वैसी हरकत करता है ।
*******

क्या होता है हाथों की रेखाओं में
मिहनत कर क्यों क़िस्मत क़िस्मत करता है ।
*******

काली काली बदली जब भी छाये तो
दहक़ाँ फिर बारिश की हसरत करता है ।
********

भेद नहीं है कोई उसकी नज़रों में
फिर क्यों तू औरों से नफ़रत करता है ।
*******

अता किया सबकुछ क़ुदरत ने उसको पर
वो तो हरदम दौलत दौलत करता है ।

मौलिक एवं अप्रकाशित। ।

Views: 255

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on September 27, 2018 at 11:40am

इस पर प्रतिक्रिया बहुत समय पहले दी थी, duplicate हो गई थी, तो अब एक को delete किया तो दोनों ही अपने आप delete हो गईं। हार्दिक बधाई, भाई आरिफ़ जी

Comment by Mohammed Arif on July 4, 2018 at 8:42pm

बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 4, 2018 at 8:39pm

मुहतरम जनाब आरिफ साहिब आ दाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |

Comment by Mohammed Arif on July 3, 2018 at 9:45pm

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 3, 2018 at 7:39pm

आ. भाई आरिफ जी, खूबसूरत गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Mohammed Arif on July 2, 2018 at 8:52pm

हार्दिक आभार आदरणीय राज़ नवादवी जी ।

Comment by राज़ नवादवी on July 2, 2018 at 5:15pm

आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ साहब, बहुत ही शानदार ग़ज़ल कही है आपने. बधाई हो. मतला भी बहुत सुन्दर बन पडा है. सादर 

Comment by Mohammed Arif on July 2, 2018 at 4:40pm

हार्दिक आभार आदरणीया नीलम उपाध्याय जी । लेखन सार्थक हो गया ।

Comment by Neelam Upadhyaya on July 2, 2018 at 4:15pm

आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी, खूबसूरत गजल की पेशकश  के लिए मुबारकबाद कुबूल करें ।

Comment by Mohammed Arif on July 2, 2018 at 1:54pm

हार्दिक आभार आदरणीय बृजेश कुमार जी।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Naveen Mani Tripathi posted blog posts
2 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

हाय क्या हयात में दिखाए रंग प्यार भी (४९)

हाय क्या हयात में दिखाए रंग प्यार भी इस चमन में साथ साथ फूल भी हैं ख़ार भी **देखते बदलते रंग मौसमों…See More
2 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post बूँद-बूँद गलती मानवता
"आपका हार्दिक आभार, मित्र नरेन्द्रसिंह जी"
9 hours ago
narendrasinh chauhan commented on vijay nikore's blog post बूँद-बूँद गलती मानवता
"खुब सुन्दर रचना सर"
10 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्रतीक्षा
"आ० समर कबीर जी  आपने हिम्मत बढ़ाई  शुक्रि, सादर "
13 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्रतीक्षा
"आ० अग्रज निकोर जी. आपके शब्द बहुमूल्य हैं मेरे लिए . सादर "
13 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्रतीक्षा
"आ० भाई सुशील सरना जी , आपकी  हौसला अफजाई से आश्वस्त हुआ "
13 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्रतीक्षा
"आ० रक्षिता सिंह . सादर आभार "
13 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post हाय क्या हयात में दिखाए रंग प्यार भी (४९)
"आदरणीय  Samar kabeer  साहेब ,आपकी इस्लाह बहुत ही पुरअसर है और मिसरे को वाजिब अर्थ…"
17 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह मई 2019 – एक प्रतिवेदन                                      डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

बैशाख उतर रहा था, ज्येष्ठ की मुद्रा आक्रामक थी I मौसम के इस संधिकाल में जब ग्रीष्म ने अपनी जिह्वा…See More
18 hours ago
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post हाय क्या हयात में दिखाए रंग प्यार भी (४९)
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें…"
20 hours ago
Samar kabeer commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मेंरी लाडली
"जनाब प्रदीप देवीशरण भट्ट जी आदाब,बहुत अच्छी भावपूर्ण कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार…"
21 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service