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न हो किरदार अपना रब गिरी दीवार की सूरत(९१ )

++ग़ज़ल++ ( 1222 *4 )

न हो किरदार अपना रब गिरी दीवार की सूरत

कभी बिगड़े नहीं या रब मेरे पिंदार की सूरत

**

ख़ुदाया ख़म कभी सर हो न मेरा इस ज़माने में

सदा क़ायम रहे हर पल मेरे मेआ'र की सूरत

**

दिखाए मुख़्तलिफ़ रंगों में उसने प्यार के जलवे

कभी इक़रार की सूरत कभी इंकार की सूरत

**

सितम कर दिल्लगी कर बस ख़याल इतना ज़रा रखना

न हो ये ज़िंदगी ज़िंदान-ए-तंग-ओ-तार की सूरत

**

जवानों के नए अंदाज़ आँखों में खटकते हैं

खुलेआम अब चिपकते हैं बदन ज़ुन्नार की सूरत

**

रियाया को सियासतदाँ समझ बैठे हैं रक़्क़ासा

नचाते वोट लेकर अबरू-ए-ख़म-दार की सूरत

**

मुहब्बत में जबरदस्ती चलन है पुरख़तर यारो

मना करने पे जलती है यहाँ दिलदार की सूरत

**

अजब है दौर-ए-हाज़िर हर कोई तैयार बिकने को

बदलती जा रही है आजकल बाज़ार की सूरत

**

'तुरंत'उम्र-ए-बहारां में किसी का ख़्वाब देखा था

मेरी ग़ज़लों में ढलता है वही अशआर की सूरत

**

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी |

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on April 29, 2020 at 6:22pm

आदरणीय TEJ VEER SINGH जी , हौसला आफ़जाई के लिए दिली शुक्रिया 

Comment by TEJ VEER SINGH on April 29, 2020 at 6:01pm

हार्दिक बधाई आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी जी। बेहतरीन गज़ल।

रियाया को सियासतदाँ समझ बैठे हैं रक़्क़ासा

नचाते वोट लेकर अबरू-ए-ख़म-दार की सूरत

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on April 29, 2020 at 12:04pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी , हौसला आफजाई के लिए दिली शुक्रिया 

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on April 29, 2020 at 12:03pm

 आदरणीय     लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी ,उत्साहवर्धन के लिए सादर आभार एवं नमन 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 29, 2020 at 11:55am

आ. भाई गिरधर सिह जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by नाथ सोनांचली on April 29, 2020 at 6:03am

आद0 गिरधर सिंह गहलोत जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने, बधाई स्वीकार कीजिये।

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