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जब मन वीणा के तारों पर 

स्वर शिवत्व झन्कार हुआ

चिरकालिक,शाश्वत ,असीम

प्रकटा , अमृत संचार हुआ

निर्गत हुए भविष्य  , भूत

वर्तमान अधिवास हुआ

कालातीत, निरन्तर,अक्षय

महाकाल का भास हुआ

शव समान तन,आकर्षण से

मन विमुक्त आकाश हुआ

काट सर्व बन्धन इस जग के

परम तत्व , निर्बाध हुआ

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Usha Awasthi on August 6, 2020 at 10:17am

बृजेश कुमार 'ब्रज जी,लक्षमण धामी 'मुसाफिर' जी,एवं आशीष यादव जी,आप सभी भाइयों को मेरा हार्दिक धन्यवाद

रचना अच्छी लगी ,यह जान कर आनन्द हुआ।

Comment by आशीष यादव on August 5, 2020 at 1:33pm

सुंदर रचना पर बधाई स्वीकार करें आदरणीया

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 5, 2020 at 11:05am

आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 4, 2020 at 10:03pm

सुन्दर अतीव सुन्दर रचना के लिए बधाई आदरणीया...

कृपया ध्यान दे...

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