For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

है जो कुछ भी धरती का - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' ( गजल)

२२२२/२२२२/२२२२/२२२

अपना क्या है इस दुनिया में है जो कुछ भी धरती का
आग, हवा ये, फूल, समन्दर, चिड़िया, पानी धरती का।१।
**
क्या सुन्दरवन क्या आमेजन कोलोराडो क्या गौमुख
ये  हरियाली,  रेत  के  टीले,  सोना, चाँदी  धरती  का।२।
**
हिमशिखरों  की  चमक  चाँदनी  बारामूदा  का जादू
पीली नदिया,  हरा समन्दर  ताजा  बासी  धरती का।३।
**
बाँध न गठरी लूट धरा को अपना माल समझकर तू
ज्ञात समय को  तोला  मासा  रत्ती - रत्ती  धरती  का।४।
**
धरती ने  ही  हमें  धरा  पर  मिट्टी  से  उपजाया नित
चिन्तन कर लो नाम छोड़कर जो भी बाँकी धरती का।५।
**
चुप्पी साधो मत दोहन पर शिव का इससे कोप बढ़े
दण्ड उसे तो मिलना ही  है  जो अपराधी धरती का।६।
*
*
( रचना : जून १९९२ , पृथ्वी सम्मेलन के समय )
*
मौलिक-अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

Views: 572

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 12, 2020 at 6:46am

आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन ।गजल पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया से खुशी हुई । इस स्नेह के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 12, 2020 at 6:43am

आ. मधु जी सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 12, 2020 at 6:42am

आ. भाई दण्डपाणि नाहक जी, सादर अभिवादन । गजल पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 12, 2020 at 6:40am

आ. भाई रवि भसीन जी, सादर अभिवादन । आपको गजल अच्छी लगी यह मेरे लिए हर्ष का विषय है । स्नेह व सराहना के लिए आभार ।

Comment by सालिक गणवीर on August 11, 2020 at 3:19pm

भाई लक्ष्मण धामी जी

सादर अभिवादन

सुंदर ग़ज़ल पाठकों तक पहुँचाने के लिए हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें.

Comment by Madhu Passi 'महक' on August 11, 2020 at 12:24pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी नमस्कार! बहुत ही सुंदर ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद।
Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on August 9, 2020 at 8:09pm

बहुत ख़ूब आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' भाई, इस सुंदर ग़ज़ल पर आपको ढेरों बधाई!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
21 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
43 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
45 minutes ago
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
1 hour ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
1 hour ago
Sushil Sarna posted blog posts
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
12 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
18 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service