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ग़ज़ल (किसी की याद में...)

1212 - 1122 - 1212 - (112 / 22) 

किसी की याद में ख़ुद को भुला के देखते हैं

निशान ज़ख्मों  के हम  मुस्कुरा के देखते हैं 

 

निकल तो आए हैं तूफ़ाँ की ज़द से दूर बहुत 

भँवर हैं कितने ही जो सर उठा के देखते हैं 

चले भी आओ कि अब इंतज़ार होता नहीं 

कि अब ये रस्ते हमें मुँह चिढ़ा के देखते हैं  

ये ज़िन्दगी भी फ़ना कर दी हमने जिनके लिए 

वही  तो  हैं  जो   हमें  आज़मा के  देखते  हैं  

मिटा दिए हैं निशाँ हर ख़ता के इस दिल से 

दिवार नफ़रतों  की  फिर गिरा के देखते  हैं 

दबी हुई  थी  जो  चिंगारी  उसको  देके  हवा 

हम अपने इश्क़ को फिर से जगा के देखते हैं 

पड़ी  है  धूल  जो  बरसों  से  इस  दरीचे  में 

नुक़ूश  होंगे  वफ़ा  के   हटा  के  देखते   हैं 

जमी है बर्फ़ जो रिश्तों  के दरमियाँ कब  से

ज़रा  सी  धूप उसे भी  दिखा  के  देखते  हैं 

बचे  रहेंगे   बनेंगे   या    राख    आतिश    में 

'अमीर' अब इश्क़ में ख़ुद को जला के देखते हैं 

"मौलिक व अप्रकाशित" 

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Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on August 28, 2020 at 8:07pm

आदरणीय Harash Mahajan साहिब आदाब, जनाब ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से शुक्रिया। सादर।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on August 28, 2020 at 8:04pm

जनाब रूपम कुमार जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई के लिये आपका तहे-दिल से शुक्रिया। सादर।

Comment by Rupam kumar -'मीत' on August 28, 2020 at 8:47am

जनाब अमीरुद्दीन 'अमीर' जी आदाब, सुप्रभात मेरा प्रणाम भी आपको, शे'र दर शे'र दाद पेश करता हूँ, मक़्ता बहुत पसंद आया वाह!

Comment by Harash Mahajan on August 27, 2020 at 8:38pm

वाह आदरणीय बहुत ही सुंदर शेरों से पेश की गई ग़ज़ल । दिली मुबारकबाद।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on August 26, 2020 at 5:16pm

मुहतरम जनाब आशीष यादव जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई के लिये दिल की गहराईयों से शुक्रिया। सादर।

Comment by आशीष यादव on August 25, 2020 at 11:59pm

सुंदर शेरों से सजी अच्छी गज़ल बनी है। बधाई स्वीकार कीजिए।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on August 25, 2020 at 6:05pm

आदरणीय जनाब सुशील सरना जी ख़ाक़सार की ग़ज़ल पर आपकी आमद मेरे लिए मसर्रत की बात है, सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से शुक्रिया जनाब।  सादर।

Comment by Sushil Sarna on August 24, 2020 at 8:52pm

वाह आदरणीय जी वाह खूबसूरत अहसासों से लबरेज़ इस खूबसूरत गज़ल के लिए दिल से मुबारक कबूल फरमाएं सर।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on August 22, 2020 at 8:07pm

मुहतरमा डिम्पल शर्मा जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद, हौसला अफ़ज़ाई और ग़ज़ल पसंद करने के लिये बहुत शुक्रिया। सादर। 

Comment by Dimple Sharma on August 22, 2020 at 7:54pm

आदरणीय अमीरुद्दीन'अमीर'साहब आदाब,वाह बहुत ख़ूब आदरणीय,सारे शेर बहुत ख़ूब हुए हैं, खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।

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