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कच्ची मिट्टी का ढेला था,
छोटा सा जीव नादान था।
क्या सही और क्या गलत,
इस सबसे अनजान था।।

प्रथम गुरु मेरे मात पिता हैं,
चरणों में उनके नमन करूं।।
ज्ञान दिया है मुझको इतना,
शब्दों में कैसे बयां करूं?

नमन मेरा सभी गुरुओं को,
वंदन बारंबार है।
अज्ञानता के अन्धकार को मिटा,
फैलाया जीवन में प्रकाश है।

धन्यवाद उन मित्रों का भी,
जो हरदम मुझको ज्ञान हैं देते।
खेल खेल में सहज भाव से,
मुझमें नई ऊर्जा भर देते।।

शिक्षक दिवस के अवसर पर,
सभी गुरुओं को नमन है।
हाथ जोड़कर दिल से धन्यवाद,
जिन्होंने कर दिया जीवन चमन है।।

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Comment by Neeta Tayal on September 10, 2020 at 10:38pm

Thanks ji

Comment by Samar kabeer on September 7, 2020 at 7:45pm

मुहतरमा नीता जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Neeta Tayal on September 5, 2020 at 6:30am

आदरणीय डिंपल जी हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत आभार

Comment by Dimple Sharma on September 5, 2020 at 3:57am

आदरणीया नीता तयाल जी नमस्ते,आज शिक्षक दिवस के उपलक्ष पर आपकी ये रचना पढ़कर बहुत अच्छा लगा, खुबसूरत कविता पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।

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