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हिन्दी बोलने में ना सकुचेंगे

"हिन्दी बोलने में ना सकुचेंगे"

हिन्दी मातृभाषा है मेरी,
फिर क्यूं बोलने में शरमाऊं।
पट पट पट पट अंग्रेजी बोलना,
क्यूं ही मैं हरदम चाहूँ।।

हिन्दी बोलूं तो गंवार लगूं,
जो अंग्रेजी बोलूं तो शान।
क्यूं हम हिन्दी होकर भी,
नहीं करते हिन्दी का सम्मान।।

विदेशी भारत आकर भी,
इंग्लिश में ही बातें करता।
फिर भारतीय विदेश में जाकर ,
क्यूं हिन्दी बोलने में है कतराता ।।

गीता का उपदेश भी कृष्ण ने ,
हिन्दी में ही सुनाया है।
रामायण को वाल्मीकि ने,
हिन्दी में ही गाया है।।

युगों युगों से हिन्दी और संस्कृत का,
परचम भारत में लहराया है।
पर मॉडर्न भारत में अंग्रेजी ने,
झण्डा अपना लहराया है।।

हिन्दी दिवस पर आज हम हिन्दी,
सब मिलकर प्रण ये लेते हैं।
हिन्दी भाषा का सम्मान करेंगे और
हिन्दी बोलने में ना सकुचेंगे।।

नीता तायल
"मौलिक और अप्रकाशित"

Views: 525

Comment

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Comment by Neeta Tayal on September 13, 2020 at 10:49am

आदरणीय सर बहुत बहुत शुक्रिया आपका,माफी चाहूंगी में आपकी सुन्दर रचनाओं पर अभिव्यक्ति प्रकट नहीं कर पाती

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 13, 2020 at 10:43am

आ. नीता जी, सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Neeta Tayal on September 10, 2020 at 4:33pm

बहुत बहुत शुक्रिया आपका

Comment by Samar kabeer on September 10, 2020 at 3:56pm

मुहतरमा नीता जी आदाब, अच्छी रचना है, बधाई स्वीकार करें ।

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