For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा

तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा
हर बार मुझ से पहले तेरा नाम आएगा.
.

अच्छा हुआ जो टूट गया दिल तेरे लिए
वैसे भी तय नहीं था कि किस काम आएगा.
.

अब रात घिर चुकी है इसे लौट जाने दे
यादों का क़ाफ़िला तो हर इक शाम आएगा.`
`

उर्दू की बज़्म में कभी हिन्दी चला के देख
तेरे कलाम में नया आयाम आएगा.
.
उस सुब’ह धमनियों में ठहर जाएगा ख़िराम  

जिस भोर मेरे नाम का पैग़ाम आएगा.
.

करने लगूँगा रक्स सितारों के दरमियाँ
घर पर पहुँच के “नूर” को आराम आएगा.
.
निलेश "नूर"
मौलिक/ अप्रकाशित 

Views: 896

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 30, 2020 at 12:41pm

धन्यवाद आ. लक्ष्मण धामी जी 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 30, 2020 at 7:22am

आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 29, 2020 at 9:26am

धन्यवाद आदरणीया डिम्पल जी।

आभार

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 29, 2020 at 9:26am

शुक्रिया आ. सालिक गणवीर जी,

आप की बात से पहले भी मैं ये और कि पर बहुत कुछ सोच रहा था। अस्ल में अब भी सोच रहा हूँ। कुछ नए शब्द भी हैं जिनसे तरक़ीब बदल सकती है। सोचता हूँ।

आपका बहुत धन्यवाद।

Comment by Dimple Sharma on September 29, 2020 at 5:56am

आदरणीय नीलेश जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें, उर्दू की बज़्म में.. वाह बहुत ख़ूब आदरणीय,ये शेर बहुत सादा और बहुत ख़ूब हुआ है बधाई आपको।

Comment by सालिक गणवीर on September 28, 2020 at 10:36pm

मुहतरम ' नूर ' साहेब

क्या ग़ज़ल कही है आपने. वाह.सराहना के लिये शब्द नहीं. वाआआआह.

दूसरे शैर के सानी में "कि" चुभ रहा है. "ये" लिखें तो काम बन सकता है,आदरणीय.

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 28, 2020 at 4:52pm

आ. समर सर,

आयाम हिन्दी का शब्द है , जैसा ऊला में कहा गया है... और आयाम का अर्थ होता है डायमेंशन ..
चूँकि नूर का घर सितारों में है इसलिए उसे वहीं चैन आएगा वो वहीँ ख़ुश होगा.. घर पर में पर वाली चिंता दुरुस्त है ..कुछ सोचता हूँ..
ख़िराम का अर्थ जहाँ तक मैंने समझा है वो चाल, गति रफ़्तार ग्रेसफुल walk आदि भी है अत: मेरे हिसाब से ये दुरुस्त है .
सादर 

Comment by Samar kabeer on September 28, 2020 at 4:18pm

जनाब निलेश 'नूर' जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल कही आपने, बधाई स्वीकार करें ।

 
'तेरे कलाम में नया आयाम आएगा'

इस मिसरे में 'आयाम' किस भाषा का शब्द है,और इसका अर्थ क्या है? बताने का कष्ट करें ।

'करने लगूँगा रक्स सितारों के दरमियाँ 
घर पर पहुँच के “नूर” को आराम आएगा'

मक़्ते के दोनों मिसरों में मुझे रब्त महसूस नहीं हुआ, और 'घर' के साथ 'पर' का प्रयोग भी उचित नहीं लगा, इस पर प्रकाश डालें ।

'उस सुब’ह धमनियों में ठहर जाएगा ख़िराम' 

इस मिसरे में 'ख़िराम' का अर्थ  नाज़-ओ-अदा की चाल,मटक चाल होता है,मगर इस अर्थ से मिसरा समझ नहीं आ रहा है ।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 27, 2020 at 7:38pm

शुक्रिया आ. दण्डपाणी जी 
आभार 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 27, 2020 at 7:38pm

शुक्रिया आ. रूपम जी,

आपके लिए आज का टास्क है कि इस बह्र के अरकान लिखें..इससे आप की भी प्रैक्टिस हो जाएगी.
चला के देख इस्लियेकाहा कि किसी ने कह दिया था की नहीं चलता :) 
सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
18 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
18 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
18 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
19 hours ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
19 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service