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आशंका :,,,,,,,,,
वृक्ष की सबसे ऊँची टहनी पर
एक लम्बी चोंच वाला पक्षी
चुपचाप
अपनी आँखें बन्द किये
अपने धवल पंख समेटे हुए
शायद किसी तपस्या में लीन था
जाने किस ने
उसकी तपस्या में विघ्न डाला
कि खुल गया
उसका बन्द नेत्र
नेत्रों में क्रोध की लालिमा
शून्य को भेदता
पंखों का तांडव
तड़प गई
सैकड़ों मछलियाँ
सामने के तालाब में
अनजानी
आशंका से
सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Sushil Sarna on February 7, 2021 at 2:56pm

आदरणीय   लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on February 7, 2021 at 2:55pm

आदरणीय   अमीरुद्दीन 'अमीर' जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on February 7, 2021 at 2:55pm

आदरणीय  Krish mishra 'jaan' gorakhpuri जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on February 7, 2021 at 2:54pm

आदरणीय समर कबीर साहिब , आदाब , सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 31, 2021 at 4:26pm

आ. भाई सुशील जी सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई । 

Comment by Samar kabeer on January 30, 2021 at 5:57pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on January 30, 2021 at 10:30am

जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है बधाई स्वीकार करें। सादर। 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on January 29, 2021 at 6:49pm

आ. सुशील सरन जी रचना का सार तो समझ नहीं सका, लेकिन आपने चित्रण बखूबी किया है, दृश्य जीवंत हो गया। हार्दिक बधाई,

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