For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल-गलियों में सन्नाटा पसरा शमशानों में शोर

बह्र-ए-मीर

मुद्दत से वीरान पड़े इस उजड़े खंडर की
अब कौन करे परवाह जहाँ में दीदा-ए-तर की

गलियों में सन्नाटा पसरा शमशानों में शोर
आँखों को उम्मीद नहीं थी ऐसे मंज़र की

पास तुम्हारे बढ़ने लगता है जब कोलाहल
याद बड़ी तब आती है अपने सूने घर की

मिलकर मंज़िल पा लेंगे कब ऐसा बोला था
लेकिन तैयारी करते दोनों एक सफ़र की

अक्सर दरवाजे पे आ 'ब्रज' ने राह निहारी
इक दिन तो चिट्ठी आयेगी मेरे दिलबर की

अन्दर के खालीपन से डर डर के घबरा के
'ब्रज' आया पास तुम्हारे तुमने तंग-नज़र की
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Views: 576

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 31, 2021 at 7:55pm

आपने ठीक ही कहा है आदरणीय समर जी...देखने में सबसे आसान लेकिन निभाने में मुश्किल बह्र...जरूर आपकी सलाहनुसार और पढ़ने की कोशिश करूँगा... बिना पढ़े तो वैसे भी गुजारा नहीं है।सादर

Comment by Samar kabeer on August 31, 2021 at 3:39pm

मतले और मक़्ते का सानी सुधारना इस बह्र में बहुत मुश्किल है, इस बह्र पर कुछ ग़ज़लें पढ़ें और देखें कि इसे कैसे निभाया जाता है, कुछ ग़ज़लें तो मेरे ब्लॉग पर ही मिल जाएँगी ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 30, 2021 at 11:12pm

आदरणीय समर कबीर जी ग़ज़ल पे आपकी शिरकत...हौसलाफजाई और हमेशा की तरह ज्ञानबर्धक टिप्पड़ी के लिए आपका शुक्रगुजार हूँ...

दरअसल खंडर और दीदा-ए--तर ये दोनों ही शब्द हूबहू रेख़्ता में कई बार पढ़े हैं...इसलिए इस्तेमाल किया है।इसके अलावा मतले का सानी बन ही नहीं रहा था मुझसे इसलिए "अब" शब्द जबरजस्ती रख दिया है।चौथा शे'र कमजोर तो है..कुछ सुधार की कोशिश करता हूँ। 'तंग-नज़र' में यदि नज़र को 12 मानलें तो बह्र दुरुस्त है।आगे आपकी सलाह की प्रतीक्षा में...सादर

Comment by Samar kabeer on August 30, 2021 at 6:30pm

जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आदाब, 6 फ़ेलुन 1 फ़ा पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

'मुद्दत से वीरान पड़े इस उजड़े खंडर की
अब कौन करे परवाह जहाँ में दीदा-ए-तर की'

मतले के ऊला मिसरे में 'खँडर' शब्द को अमूमन 12 पर लिया जाता है,लेकिन कहीं कहीं इसे 22 पर भी देखा गया है ।

सानी मिसरे में पहली बात ये कि 'दीदा-ए-तर' को "दीद-ए-तर" लिखा जाता है,और इस मिसरे की बह्र भी चेक करें, मिसरे में लय बाधित है ।

'लेकिन तैयारी करते दोनों एक सफ़र की'

ये मिसरा मात्रा के हिसाब से पूरा है, लेकिन शब्द विन्यास के कारण इसमें गेयता नहीं है,ग़ौर करें ।

'ब्रज' आया पास तुम्हारे तुमने तंग-नज़र की'

इस मिसरे की बह्र चेक करें ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 29, 2021 at 7:42am

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय अमीरुद्दीन जी...

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on August 27, 2021 at 8:00pm

जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आदाब, बह्र-ए-मीर पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
Oct 26
Sushil posted blog posts
Oct 26
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Oct 26
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service