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ममता पर दोहे .....

जाते हैं जो चूमकर, मात-पिता के पाँव ।
राहों में उनके नहीं, आते दुख के गाँव ।1।

जीवन में आते नहीं, उनके दुख के गाँव ।

जिनके सिर रहती सदा, आशीषों की छाँव ।2।

धन वैभव संसार में, मिल जाते सौ बार ।
मिलें नहीं जाकर कभी, मात-पिता साकार  ।3।

दृष्टि धुंधली हो गई, काया हुई निढाल ।
आई बेला साँझ की,  ढूँढे नैना लाल ।4।

ममता ढूँढे पालने, में अपना वो लाल ।
जिसको देखे हो गए, जाने कितने साल ।5।

बूढ़ी काया को लगे, अगला हर पल काल ।
देखो बनकर आ गया, लाठी मेरा लाल ।6।

किसने देखा स्वर्ग का , कैसा है संसार ।
माँ का आँचल स्वर्ग है, पिता जगत आधार ।7।

दूध पिलाकर लाल को, माँ को मिले सुकून ।
पवन स्वार्थ का ले उड़ा, आँगन खिले  प्रसून ।8।

वर्तमान संसार में, अब है अर्थ महान ।
हर रिश्ते की अर्थ से, अब होती पहचान ।9 ।

सुशील सरना / 131221

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by Sushil Sarna on January 7, 2022 at 2:16pm
आदरणीय समर कबीर जी आदाब, सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । सादर नमन
Comment by Samar kabeer on December 21, 2021 at 8:38pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, ममता पर अच्छे दोहे रचे आपने, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sushil Sarna on December 16, 2021 at 1:34pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।सहमत एवं संशोधित
Comment by Sushil Sarna on December 16, 2021 at 1:34pm
आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब, आदाब - सृजन के भावों को आत्मीय मान देने और सुझाव देने का दिल से आभार । आपका सुझाव सिर माथे ।हार्दिक आभार सर ।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 16, 2021 at 8:37am

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुन्दर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई। भाई अमीरुद्दीन जी की बात पर गौर कीजिएगा सादर..

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on December 15, 2021 at 10:27pm

आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, सुंदर दोहे रचे हैं आपने  हार्दिक बधाई।

"जीवन में आते नहीं, उनके दुख के गाँव ।

आशीषों की हो अगर, सिर पर उनके छाँव।"    इस दोहे का शिल्प दोनों पंक्तियों में 'उनके' के कारण गड़बड़ हो गया है,

'जिनके सिर रहती सदा, आशीषों की छाँव।'   सादर। 

Comment by Sushil Sarna on December 15, 2021 at 1:30pm
आदरणीय तेज वीर सिंह जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से सम्मानित करने का दिल से आभार
Comment by TEJ VEER SINGH on December 15, 2021 at 12:19pm

हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी। लाजवाब दोहे।

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