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जन लोकपाल लिए मन माहि ,

जन लोकपाल लिए मन माहीं ,

अन्ना बोले जन सन्मुख जाहीं ,
साथ किरण बेदी आई ऐसे , 
राम काज लगी हनुमत जैसे ,
कपिल आये रूप धरि रावण ,
चाहैं  कार्य बिगारन पावन ,
जन समर्थन अन्ना जो पाये ,
तबहिं बिरोधि हुडदंग मचाये ,
मांग भई अस संसद बिरोधी ,
आयें प्रधान देख गतिरोधी ,
संसद कुछ जनहित में सोचा ,
हिंद की जनता का सिर ऊँचा" ­ ,
  

 

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Comment

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Comment by Rash Bihari Ravi on September 6, 2011 at 5:41pm

dhanyabad ganesh ji dushyant ji

Comment by दुष्यंत सेवक on September 6, 2011 at 3:42pm

ati sundar guru ji...


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 4, 2011 at 5:12pm

हा हा हा हा , बहुत खूब गुरु जी, बढ़िया लिखे है , आभार आपका |

Comment by Rash Bihari Ravi on September 3, 2011 at 3:16pm

dhanyabad arun ji aapki comment padh kar man bag bag ho gaya

Comment by Abhinav Arun on September 3, 2011 at 3:00pm
वाह गुरु जी चालीसा बनता तो और मज़ा आता ..छोटी मगर "घाव करे गंभीर "श्रेणी की रचना ! बधाई !! 
Comment by Rash Bihari Ravi on September 3, 2011 at 2:54pm

ok sir isko guruvar yograj ji se salah lete hain 

Comment by आशीष यादव on September 3, 2011 at 2:52pm

guru ji, total 11 matra pe kaise hai. har jagah to matra 11 se adhik hi hai.

chaupai me waise bhi 16 matrayen pratyek charan me hoti hai. punarwichar karen.

Comment by Rash Bihari Ravi on September 3, 2011 at 2:35pm

bahut badhia ashish ji lekin total 11 matra pe hi hain

Comment by आशीष यादव on September 3, 2011 at 1:44pm

गुरु जी अभी भी बहुत कुछ बाकी है, लेकिन आपकी रचना अच्छी है| सुन्दर चौपाइयां लिखी हैं|
थोड़ा संशोधन चाहिए इस पंक्ति में,

साथ किरण बेदी आई ऐसे ,ko

साथ किरण जी  आई ऐसे , कर दे तो मात्र की त्रुटी समाप्त हो जाय| अगर मै गलत हूँ तो गुणीजन  मार्ग दिखाएँ|

Comment by Rash Bihari Ravi on September 3, 2011 at 1:30pm

dhanyabad ganesh ji aur satish ji

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