For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बड़ी मेहनत से जो पाई वो आज़ादी बचा लेना

बड़ी मेहनत से जो पाई वो आज़ादी बचा लेना
तरक्की के सफ़र में थोडा सा माजी बचा लेना

बनाओ संगेमरमर के महल चारो तरफ पक्के
मगर आंगन के कोने में ज़रा माटी बचा लेना

चुभी थी फांस बनकर गोरी आँखों में कभी खादी
न होने पाए इसकी आज बदनामी बचा लेना

कोई भूखा तुम्हारे दर से देखो लौट ना जाये
तुम अपने खाने में से रोज़ दो रोटी बचा लेना

लगा पाओ वतन पर मरने वालो का कोई बुत भी
कोई नुक्कड़ तुम अपने बुत से भी खाली बचा लेना

(बहरे हज़ज़ मुसम्मन सालिम, अरकान मफाईलुन एक मिसरे में चार बार)

Views: 426

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 15, 2010 at 6:24pm
बड़ी मेहनत से जो पाई वो आज़ादी बचा लेना
तरक्की के सफ़र में थोडा सा माजी बचा लेना
इस माज़ी को बचाना जब दकियानूसी समझा जाने लगे तो कवि की यह गुहार उसके आंतरिक ताकत और मानसिक गठन को बताती है.
किस-किस की चर्चा करूँ? माटी बचाने का संदर्भ हो या रोटी बचाने का सामाजिक-दायित्व निखर कर आया है. और तो और बुतों और पुतलों की बात कितनी सहजता से कही गई लगती है. मगर समझ बताती है कि अब कमजर्फ़ी की इंतहा क्या-क्या दिखा रही है. राणाप्रतापजी बहुत अच्छे. बहुत खूब.
Comment by sanjiv verma 'salil' on August 15, 2010 at 11:51am
शानदार और जानदार रचना के लिये बधाई. आपने बहर, काफिया और रदीफ़ के साथ न्याय किया है.

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 15, 2010 at 11:41am
बनाओ संगेमरमर के महल चारो तरफ पक्के
मगर आंगन के कोने में ज़रा माटी बचा लेना,
राणा भाई,बहुत खूब , सर्वप्रथम तो मैं भी आपको स्वतंत्रता दिवस की बधाई देना चाहता हूँ तत्पश्चात स्वतंत्रता दिवस पर लिखी इस खुबसूरत और बेहतरीन ग़ज़ल पर भी बधाई स्वीकार करे, बहुत ही उम्द्दा और सुंदर शब्दों से सुसज्जित शानदार रचना, बहुत बहुत धन्यवाद इस रचना पर,
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on August 14, 2010 at 8:12pm
bahut hi badhiay rachna rana bhai....ye rachna sach puchiye to ekdam se dil ko chu gayi...
waah bhai waah behtareen rachna......aapne ek sachhe desh bhakt hone ka saboot diya hai is rachna ke madhyam se....
bijayi bishwa tiranga pyara,
jhanda ucha rahe hamara......

jai hind.....jai obo
Comment by आशीष यादव on August 14, 2010 at 6:27pm
आपको मेरा सादर प्रणाम,
आपकी ये रचना छू गयी मेरे ह्रदय को| किसी को भी उसकी आजादी बहुत अच्छी लगती है| अगर आप अपनी अच्छी शय को बचा के नहीं रखेंगे तो ये दुनिया वाले बहुत जल्दी छीन लेंगे|
हर वक़्त देश से प्यार करना चाहिए, अपनी मिटटी से प्यार करना चाहिए. एक कवि ने कहा भी है.
जो भरा नहीं है भांवों से, जिसमें बहती रसधार नहीं|
वह ह्रदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं||

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
20 hours ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
22 hours ago
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
yesterday
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
Saturday
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
Saturday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
Saturday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
Saturday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service