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ग़ज़ल :- उसके होने के ही एहसास में जाकर देखो

 
 
ग़ज़ल :-  उसके होने के ही एहसास में जाकर देखो
 
उसके होने के ही एहसास में जाकर देखो ,
किसी रोते हुए बच्चे को हंसाकर देखो |
 
नेक नीयत हो तो नालों में असर होता है ,
मेरी आवाज़ में आवाज़ मिलाकर देखो |
 
तर्क की आंच कई रिश्ते जला देती है ,
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटाकर देखो |
 
फूल पत्ते भी अघाते हैं दुआ देते हैं ,
घर के आँगन में कोई पौध लगाकर देखो |
 
दस्यु भी संत बना करते हैं इस धरती पे ,
अपने भीतर ही तुम बुद्धत्व जगाकर देखो |
 
सोच ही आदमी को गाँधी बना देती है ,
क्या ज़रूरी है कि अफ्रीका में जाकर देखो |
 
आदमी आदमी का भेद ही मिट जाएगा ,
अपने अंतर में कबीरा को बिठाकर  कर देखो  |
 
                          - अभिनव अरुण {30102011}
 
 
 
 

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Comment

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Comment by Abhinav Arun on December 9, 2011 at 6:06am
Abhaar Ashwani Ji.
Comment by ASHVANI KUMAR SHARMA on December 8, 2011 at 11:13pm

badhiya gazal ......badhaai 

Comment by Abhinav Arun on December 1, 2011 at 7:04am
shukriya Raj Sahab.
Comment by राज लाली बटाला on December 1, 2011 at 12:55am

उसके होने के ही एहसास में जाकर देखो ,

किसी रोते हुए बच्चे को हंसाकर देखो |वाह  अभिनव जी ~~सही कहा  आपने !!

Comment by Abhinav Arun on November 4, 2011 at 5:47am
sneh ke liye abhaar Avinash ji
Comment by AVINASH S BAGDE on November 2, 2011 at 8:59pm

BAHUT DARJEDAR RACHANA..Abhinav ji.

 

Comment by Abhinav Arun on October 31, 2011 at 11:55am

thanks ashish  ji for your valuable comments

Comment by आशीष यादव on October 30, 2011 at 8:57pm

aadarniy shri Arun Kumar Pandey 'Abhinav' ji, sada se hi maine aapki rachnao ko pasand kiya hai. aapki ye rachna bhi bahut achchhi lgi. kuchh wyastta ke karan mai mushayare me shamil nahi ho ska tha. lekin aapki ye rachna yaha padh kar mujhe bahut khushi hui. aapki lekhni ko naman.

Comment by Abhinav Arun on October 30, 2011 at 2:49pm

आभार वीनस जी सोचा था इस बार ग़ज़ल को आपसे ठीक करवा कर पोस्ट करूँगा पर संयोग नहीं बन पाया !! :-)) आपपे ये कार्य due  रहेगा अगली बार के लिए :-))

Comment by वीनस केसरी on October 30, 2011 at 2:14pm

सुन्दर ग़ज़ल है

खूब पसंद आई

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