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ग़ज़ल :- उसके होने के ही एहसास में जाकर देखो

 
 
ग़ज़ल :-  उसके होने के ही एहसास में जाकर देखो
 
उसके होने के ही एहसास में जाकर देखो ,
किसी रोते हुए बच्चे को हंसाकर देखो |
 
नेक नीयत हो तो नालों में असर होता है ,
मेरी आवाज़ में आवाज़ मिलाकर देखो |
 
तर्क की आंच कई रिश्ते जला देती है ,
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटाकर देखो |
 
फूल पत्ते भी अघाते हैं दुआ देते हैं ,
घर के आँगन में कोई पौध लगाकर देखो |
 
दस्यु भी संत बना करते हैं इस धरती पे ,
अपने भीतर ही तुम बुद्धत्व जगाकर देखो |
 
सोच ही आदमी को गाँधी बना देती है ,
क्या ज़रूरी है कि अफ्रीका में जाकर देखो |
 
आदमी आदमी का भेद ही मिट जाएगा ,
अपने अंतर में कबीरा को बिठाकर  कर देखो  |
 
                          - अभिनव अरुण {30102011}
 
 
 
 

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Comment by Abhinav Arun on October 30, 2011 at 2:05pm

कुछ दीपावली की छुट्टी

कुछ जिम्मेदारिओं  के पीछे पड़े भूत

कुछ नेट की धीमी साथ छोडती गति

कि इस बार तरही में शामिल नहीं कर पाया अपनी ग़ज़ल

 सो इस जगह दे रहा हूँ ताकि सनद रहे !

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