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बीत गए बरस तिरसठ 

 हुआ  देश स्वतंत्र 
तन से नंगा हाथ में तिरंगा 
कैसा ये गणतंत्र  
अब तो राम बचावे !!
सुन्न हो गई ठण्ड  से काया 
थर थर काँपे रंक की छाती 
शाल ओढ़ कर शान से बैठे
देखो पत्थर के हाथी 
अब तो राम बचावे !! 
न मांझी न पतवार 
नौका बीच मजधार 
सीमा पे छिड़ गई जंग 
राजा ने पी ली भंग 
अब तो राम बचावे !!
सिंघों में मच गई होड़ 
रहे मेमने दौड़ 
सर पे टोपी तन पे खादी
देश की करें निशदिन बर्बादी
अब तो राम बचावे !!
 ना अंगुली ना लाठी 
बूढ़े की गिर गई काठी 
सियासत में हडकंप 
नाच रहे दल दबंग 
अब तो राम बचावे !!
जय गणतंत्र दिवस !!

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 24, 2012 at 9:44am

bahut bahut abhar Saurabh ji aur Ganesh ji.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 1, 2012 at 12:32pm

shukria Aasheesh ji

Comment by आशीष यादव on February 1, 2012 at 12:08pm
Bahut sundar ewam samyik rachna hai. Aaj ki (dur)dasha ka warnan hai. Badhai swikarein.

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 1, 2012 at 11:08am

bilkul sahi kah rahi hain seema ji.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 29, 2012 at 10:01am

dhanyavaad Sanjay ji.

Comment by Sanjay Rajendraprasad Yadav on January 29, 2012 at 9:46am
बहुत ही खुबसूरत बधाई आपको |

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 27, 2012 at 9:13am

dhanyavaad Shanno ji ,Saurabh ji ,Ganesh jee.

Comment by Shanno Aggarwal on January 26, 2012 at 11:22pm

देश की हकीकत पर बढ़िया रचना. बधाई.  


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 26, 2012 at 9:39pm

सुन्न हो गई ठण्ड से काया
थर थर काँपे रंक की छाती
शाल ओढ़ कर शान से बैठे
देखो पत्थर के हाथी
अब तो राम बचावे !!

भाई, वाकई अब तो राम बचावे !... .. हा हा हा..  बहुत खूब !!

 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 26, 2012 at 8:03pm

वाह वाह वाह, इसे कहते है धो कर निचोड़ देना वो भी बगैर साबुन के, बहुत ही खुबसूरत और सामयिक रचना है, बधाई आपको |

कृपया ध्यान दे...

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