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देखें हैं हमने नज़ारे कई , शरारे कही  तो बहारें कई ,

लिखी-पढ़ी  है खूबसूरती की कई परिभाषाएं 
कही-सुनी है इबादत ए हुस्न की कई कवितायेँ 
लेकिन आज एक नयी बात कह रहा हूँ 
दिल की धडकनों की जुबान बन रहा हूँ
सोचता था हुस्न की तारीफ करूँ लेकिन, उसकी आँखों ने ही रोक लिया  मुझे 
उसकी आँखों को जब पहली बार देखा तो एक मुस्कराहट उनमे बिखरी थी 
शर्मो हया और तहज़ीब की कलि उनमे खिली थी 
धुप की रौशनी में जब उसकी ऑंखें मेरी और मुड़ी
थम सा गया था यह समां एक पल , ऐसी थी वोह घडी  
ऐसा लगा जैसे मेरे दिल की तरंगें  उसकी तरंगों से जाकर जुडी 
जब मुस्कुराकर उसने होठों  से कुछ कहा 
ऐसा लगा जैसे कई मोर पंखों ने मेरे कानों को छुआ 
वो  दो शब्द नहीं थे , मेरे लिए थी रब की थी दुआ  
ऐसा लगा जैसे उसे रब ने मेरे ही लिए चुना 
पहली मुलाकात का ही ऐसा यह असर था 
 पहला नशा था ऐसा की हर नशा बेअसर था 
 आगे बढ़ा  बातों  का सिलसिला फिर 
नज़रों  की अदला बदली शुरू हुई फिर 
एक बात नयी थी उसकी निगाहों में आज 
मुझे देख के रुक सी जाया करती थी 
मेरे लिए एक अलग ही चमक थी उनमे 
जो बातों  के साथ और रोशन होती थी 
वोह पंखुड़ी से होठों से जो मुस्कान उसके चेहरे पे आकार रूकती थी
उनमे मैं  हजारों गुलाबों को महसूस करने लगा 
वोह मासूमियत भरा उसका चेहरा जो कलियों को मुरझा दे ,
मुझे देख न जाने क्यों दमकने लगा 
उसकी बातों में अपनापन महसूस होने लगा 
न जाने में क्यों उसके करीब आने लगा , 
सालों से जो तनहा था ,न जाने क्यों उसे पाने लगा 
बातों ही बातों में न जाने कब दिल रेत सा हाथ से फिसल गया  
उससे बातें करना न जाने कब मेरी आदत बन गई
साथ  में जब एक दिन ख़ुशी थी , उससे जुदाई का ग़म उस ख़ुशी पर भरी पढ़ गया 
उससे कुछ पल जुदा होने पर न जाने क्यों जान सी जाने लगी 
सपनो में रात दिन वोह आने लगी
मिलना तो  है हमें बहुत जल्द लेकिन यह दिल न थम जाये उनसे मिलकर...................
  

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Comment by Dr.Prachi Singh on June 6, 2012 at 10:33am
बहुत सुन्दर कोमलतम एहसासों को  शब्द दिए हैं आपने रोहित..
पर ज़िंदगी में सब कुछ रेत की तरह हमेशा ही हाथों से फिसल जाता है,
हम यहाँ (दुनिया में) कुछ पकड़ कर रखने और रुक जाने को नहीं आये हैं, बस अनुभव करने और आगे बढ जाने को आये हैं.
आपका सतत लेखन प्रयास आपकी लेखनी को अवश्य निखरेगा.
इस खूबसूरत भाव सम्प्रेषण पर हार्दिक बधाई.
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 9, 2012 at 4:02pm

sama bandh diya aapne. badhai.

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