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-:प्रेम के कुछ मुक्तक:-

"कम से कम दो कदम प्रेम पथ पर चलें"


1-बात होती रहे हम कहें न कहें,
   प्रेम के अश्रुमोती बहें न बहें.
   डोर टूटे न ये तोड़ने से कभी, 
   प्यार निभता रहे हम रहें न रहें..
.
.
2-स्वप्न टूटा तो फिर हम बिखर जायेंगे, 
   साथ छूटा तो फिर हम  किधर  जायेंगे .
   खुश हूँ उसकी ख़ुशी से कि खुश वो रहे
   दुःख जो उसको मिला हम सिहर जायेंगे ..
.
.
3-हो चमन में कोई पुष्प खिलता हुआ ,
   हर किसी का तुम्हे प्रेम मिलता हुआ. 
   प्रीति अभिसार  करती  रहेगी  सदा ,
   होंठ पर प्रेम का  गीत  सजता  हुआ ..
.
.
4-प्रेम में डूबे दिल अब कहाँ के रहे, 
   ख्वाब जितने हंसी शाहजहाँ के रहे .
   प्रेम बलिदान की कोई कीमत नहीं, 
   न तो खुद के रहे  न जहाँ  के  रहे ..
.
.
5-वो किसी से मिले मन ही मन हम जलें, 
   साथ  उनके  रहें  क्यों  ये  सपने  पलें. 
   ऐसे उदगार दिल  में  करूँ  क्या  सनम, 
   कम से कम दो कदम प्रेम पथ पर चलें ..
.
.
6-प्रेम शुचिता में मेरा खरा है सनम,
   मैं हूँ तेरा गगन तू धरा है सनम. 
   ये नयन दो तुम्हारे सितम ढा गए,
   प्रेम का घट अभी तक भरा है सनम ..
 

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Comment

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Comment by deepti sharma on July 12, 2012 at 1:17am

लाजवाब बहुत खूब. बधाई.

Comment by आशीष यादव on April 5, 2012 at 11:05pm
अहा! क्या खूब कहा है। बड़े ही शानदार मुक्तक बने हैँ।
बधाई
Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on March 3, 2012 at 9:58pm

आदरणीय आनंद परवीन जी सराहना के लिए बहुत बहुत आभार 

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on March 3, 2012 at 9:57pm

आदरणीय  गणेश सर स्नेहाशीष   के लिए बहुत बहुत आभार 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 3, 2012 at 9:47pm

सभी मुक्तक अच्छे बन पड़े है भाई, किसी एक चुनना आसान नहीं, बहुत ही सुन्दर भाव पिरोये है आपने, बधाई स्वीकार करें |

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on March 3, 2012 at 3:37pm

राकेश जी सराहना  के लिए बहुत बहुत आभाऱ

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on March 3, 2012 at 3:35pm

वाहिद जी रचना पसंद करने के लिए बहुत बहुत आभार 

Comment by राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' on March 3, 2012 at 3:06pm

मृदु जी, बहुत सुंदर पंक्तियाँ, "दुःख जो उसको मिला हम सिहर जायेंगे" बहुत खूब. बधाई.

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 3, 2012 at 12:51pm

स्वप्न टूटा तो फिर हम बिखर जायेंगे, 

   साथ छूटा तो फिर हम  किधर  जायेंगे .
   खुश हूँ उसकी ख़ुशी से कि खुश वो रहे

   दुःख जो उसको मिला हम सिहर जायेंगे .

'मृदु' जी आपके लिए केवल एक शब्द है लाजवाब

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on March 3, 2012 at 11:33am

प्रदीप सर रचना पसंद करने के लिए व अपना आशिर्वाद  प्रदान करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार , नमन 

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