For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")





भारत सदैव 
आजाद था
आजाद है 
आजाद रहेगा 
 गुलामी और आजादी
 का कैसे भान हो 
शासक कोई, शासन कोई 
चाहें जो सरकार हो 
जब मानसिकता विकलांग हो 
भारत कभी जकड़ा नहीं 
गुलामी की जंजीर में 
देखने का दोष जो 
सदा रहा तक़दीर में 
लाख लिखने वालों ने
लिखा हो तहरीर में 
भारत था आजाद 
आज भी आजाद है
दुर्दशा का कारण स्वयं 
दोष देते आन का 
चाहिए कन्धा सदैव 
ध्यान नहीं मान का 
 
एक   दूसरे से नाराज हैं 
करते स्वयं कुछ भी नहीं 
सोचते विचारते हैं बहुत 
गलत सही का भान नहीं 
 
बदलती सत्ता पे चाहें 
जश्न  जितना  मना  लो
बदलोगे नहीं आप को 
तो कुछ नहीं पाओगे 
जैसे रहे तुम सदा  
वैसे ही रह जाओगे  

Views: 516

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 8, 2012 at 9:53pm

आदरणीय अविनाश बागड़े  जी, शुभ होली. पसंद आया  आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 8, 2012 at 9:50pm

आदरणीय त्रिपाठी जी, शुभ होली. आप को आंनद मिला मुझे संतोष हुआ. आभार 

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on March 8, 2012 at 9:12pm
वेरी गुड्ड रचना है हुजूर,
सदके जावां
Comment by AVINASH S BAGDE on March 8, 2012 at 7:59pm

 

बदलती सत्ता पे चाहें 
जश्न  जितना  मना  लो
बदलोगे नहीं आप को 
तो कुछ नहीं पाओगे ...nice one Pradeep ji.
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 6, 2012 at 9:30pm

धन्यवाद , आदरणीय हरीश जी, प्रयास किया है. 

Comment by Harish Bhatt on March 6, 2012 at 2:20am

आदरणीय प्रदीप जी सादर प्रणाम

सच्‍चाई बयां करती कविता के लिए हार्दिक बधाई,

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 5, 2012 at 10:02pm

आदरणीया नीरजा जी, सादर अभिवादन. आपको सपरिवार होली की बहुत बहुत शुभ कामनाएं 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 5, 2012 at 9:11pm

aadarniya vahid bhai ji, abhar to aapka hai, koyle ko bhi hira bana dete hain. saparivar holi ki shubh kamnayen

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 5, 2012 at 9:09pm

dhanyavaad mahima shree ,

saparivar holi ki shubh kamnayen

Comment by MAHIMA SHREE on March 5, 2012 at 8:56pm
बदलती सत्ता पे चाहें 
जश्न  जितना  मना  लो
बदलोगे नहीं आप को 
तो कुछ नहीं पाओगे 
जैसे रहे तुम सदा  
वैसे ही रह जाओगे
 
AAdarniy Sir Pranam......satya vachan  jab tak hum nahi badlege....kitani bhi satta badale kuch nahi balena wala......

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
yesterday
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
yesterday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
yesterday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service