For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बस! 
-----

कभी 

प्यादों सी
बेबसी को
जीता!
कभी
ढाई -घर 
उछलती 
अश्व -शक्ति के
जोश में
उफनता!
कभी 
ऊँट की
आडी -तिरछी
तिरपट-चालों का
नशा ढोता !
कभी
कोने में बैठे
हाथी की
कुंद होती
बुद्धिमत्ता का
अहसास झेलता!
कभी
मंत्री की
निरंकुशता के बीच
अकर्मण्य- राजा को
बात-बेबात
'शह' बोलकर
मात देने का
रंज!!!!
बस!
इन्ही
काले-सफ़ेद
घरों में
सिमट के
रह गया है
मेरे
जीवन का
शतरंज!!!!!!!
-----
अविनाश बागडे...

Views: 721

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by AVINASH S BAGDE on August 6, 2012 at 7:00pm

AABHAR Rajesh kumari ji.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 23, 2012 at 5:33pm

jeevan bhi ek shatranj hai aur hum sab uske kirdaar ....bahut achcha bimb prastut kiya hai Avinash ji ...vaah

Comment by AVINASH S BAGDE on March 23, 2012 at 5:13pm

Seema ji..aapni meri rachana ko samay diya...man diya...aur sateek dad di....AABHAR.

Comment by AVINASH S BAGDE on March 18, 2012 at 2:14pm

डॉ.सागर खादीवाला.....बहुत-बहुत धन्यवाद..

Comment by AVINASH S BAGDE on March 18, 2012 at 2:12pm

aabhar Arun Shri...aapki bahumooly pratikriya k liye.

Comment by AVINASH S BAGDE on March 18, 2012 at 2:10pm
अविनाशजी, बधाई,अच्छी कविता है.
दरअसल ज़िन्दगी कि तरह शतरंज में भी सबसे निरीह और दूसरों की चालों पर निर्भर  प्राणी बादशाह होता है और सबसे सरल,दृढ़,अनुशासित और
बलिदान के लिए सहज उपलब्ध मुहरा प्यादा होता है.
आपकी कविता इस मर्म से वाकिफ है.
- डॉ.सागर खादीवाला
Comment by Arun Sri on March 17, 2012 at 7:58pm

अद्भुत रचना ! लगभग अनछुए से बिम्बो के माध्यम से आपने जो रच डाला वो कमाल है ! जीवन के सत्य को और नष्ट होते जीवन मूल्यों को उजागर करती रचना के लिए बधाई !

Comment by AVINASH S BAGDE on March 17, 2012 at 7:44pm
सौरभ जी,आपकी हौसला अफजाई मुझे प्रेरणा देती है
स्नेह बनाये रखें.
Comment by AVINASH S BAGDE on March 17, 2012 at 7:44pm

शतरंज को जीवन से जोड़ने की बाजी .....

आग तेरे दिल में हो या मेरे दिल में  आग जलनी चाहिए..................सूरत बदलनी चाहिए.
विन्देश्वरी जी जिस अंदाज़ में आपने प्रतिक्रिया दी...मन को छू लिया.



सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 16, 2012 at 9:32pm

बिसात पर के मोहरों की भाव-दशा को जीती आज की ज़िन्दग़ी को सक्षम स्वर दिया है आपने, भाई अविनाशजी.  इस परख पर सादर बधाई.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Apr 21
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
Apr 19
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
Apr 19
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service