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ऐसे जीयो जिन्दगी..........

शरमाये अपनी दास्तां पर ऐसा हाल न हो
नक़्दो - नजर खुद से कोई सवाल न हो

गौर फरमा ऐ दिल कदम उठाने से पहले
कि बाद में तुझको कोई मलाल न हो

करे जुवां दिलकश ब्यां जो खुले यह कभी
टूटे न दिल किसी का जीना मुहाल न हो

न कर नापाक करतूतों से दा़गदारे जिन्दगी
जाने फिर मुस्तकबिल तेरा खुशहाल न हो

सैकड़ों सांसे पास में चंद गमों से न धबरा
क्या फायदा जिन्दगी से जो इस्तेमाल न हो

दे मुकाम जिन्दगी को एक पहचान तुं शरद
वो वजूद कैसा जिसका कोई मिशाल न हो

सुबोध कुमार शरद

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Comment by Subodh kumar on September 24, 2010 at 7:59pm
धन्यबाद प्रीतम जी.. इस हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया...
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on September 23, 2010 at 9:50pm
सैकड़ों सांसे पास में चंद गमों से न धबरा
क्या फायदा जिन्दगी से जो इस्तेमाल न हो

waah subodh jee waah...aur kya likha jaye ye ab aap hi bataye...main to ab kuch nahi likh sakta hoon....bahut hi badhiya likha hai apne....shubhkamnaye)))))))
Comment by Subodh kumar on September 18, 2010 at 2:24pm
shukriya bagi jee
Comment by Subodh kumar on September 18, 2010 at 2:24pm
dhanyabaad ashish jee
Comment by आशीष यादव on September 17, 2010 at 11:41pm
waah subodh ji. apni pahchaan jaan ne ke liye kaafi hai yah sher

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 17, 2010 at 10:27pm
वाह सुबोध भाई वाह, गज़ब का ग़ज़ल निकाला है आपने,
गौर फरमा ऐ दिल कदम उठाने से पहले
कि बाद में तुझको कोई मलाल न हो
क्या शे'र कही है आपने , वाह वाह के आलावा और क्या कह सकता हूँ , दाद कबूल कीजिये सुबोध बाबु |

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