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उसमे थी उच्छृंखलता,तुम शांति के करीब हो

वो थी सिर्फ एक घटना, शायद तुम मेरा नसीब हो

उसमे थी, पाने की चाहत तुम त्याग को प्यार कहते हो

उसकी बातें थी अविश्वसनीय,तुम विश्वास को आधार कहते हो

उसकी बातें हंसते हुए थी रुलाती,भरती थी मन में निराशा

तुम भी आशावादी,आस दिलाती तुम्हारे प्यार की भाषा

वो थी मेरी सबसे बङी भूल ,तुम सुधार बनके आऐ हो

वो था एक आकर्षण,तुम जिंदगी में प्यार बनके आऐ हो

जितना आसां है उसे भूल के जीना,उतना ही मुश्किल है

बीताना एक भी पल तुम्हारे बिना

उसे तो रिक्तता भरनी थी,जिंदगी बना गया अंधेरी रात,

तुम आशा की किरण बनकर आए ,आओ ना साथ मिलकर कर डाले

जिंदगी की एक नई शुरूआत.

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Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on April 8, 2012 at 12:23am

उसकी बातें हंसते हुए थी रुलाती,भरती थी मन में निराशा

तुम भी आशावादी,आस दिलाती तुम्हारे प्यार की भाषा

वो थी मेरी सबसे बङी भूल ,तुम सुधार बनके आऐ हो..

मीनू जी नयी शुरुआत में ही दम है ...खुशियाँ चेहरे पर लौट आयें ..गुल गुलशन खिला रहे ये क्या कम है ..आओ छोड़ें  इतिहास ..आप की सब मुरादें पूर्ण हों 
जय श्री राधे 
भ्रमर ५  
Comment by minu jha on April 5, 2012 at 11:38am

कुशवाहा जी,इसी स्नेह की अपेक्षा हमेशा रहेगी,आभार

Comment by minu jha on April 5, 2012 at 11:37am

संदीप जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका

Comment by minu jha on April 5, 2012 at 11:36am

आदरणीय शाही जी,आपका आशीर्वाद पाकर मैं धन्य हुई

सादर आभार

Comment by minu jha on April 5, 2012 at 11:35am

सादर धन्यवाद जवाहर जी,उत्साहवर्धन के लिए

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 3, 2012 at 2:16pm

snehi minu ji, sadar, sundar bhav snjoye rachna, badhai.

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 3, 2012 at 12:49pm

ज़िंदगी को एक नयी और बेहतर शुरुआत देने को तत्पर सुन्दर रचना पर बधाई मीनू जी|

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 3, 2012 at 12:06pm
जब जागे तभी सवेरा! वही से कर दें एक नयी शुरुआत! जिंदगी की एक नई शुरूआत!
बहुत ही अच्छा सन्देश!

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