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तीन वर्ण और 

एक मायावी शब्द ,

जिसके कर्णपटल में प्रवेश करते ही 
एक मासूम नन्हा बालक 
जो अपने जीवन का
पहला कदम रख रहा है, 
उत्साहित और रोमांचित हो उठता है 
कैसा अद्दभुत  रिश्ता है इस शब्द का 
मन मस्तिष्क की तंत्रिकाओं  से 
जिसके तिलस्मी प्रभाव से 
चार सीढियां चढ़ता हुआ 
इंसान आठ सीढियां चढ़ जाता है |
और एक दिन अम्बर छूने में 
कामयाब हो जाता है| 
सभी का वांछित ,अपेक्षित 
जिसकी उत्कंठा जीवन पर्यन्त बनी रहती है 
शब्द कितना सरल ,कितना अनमोल है 
फिर क्यूँ इसे कहने में कंजूसी करना!
इसका चमत्कार देखना है कभी तो 
किसी हतोत्साहित ,टूटते हुए 
इंसान के काँधे पर हाथ रख कर 
एक बार तो कह कर देखिये 
            शाबाश !!!   

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Comment by rajesh kumari on April 5, 2012 at 12:05pm

बहुत बहुत शुक्रिया मीनू जी 

Comment by minu jha on April 5, 2012 at 12:02pm

तीन वर्ण और एक मायावी शब्द,

सच कहा आपने ,जीवन की संतुष्टि सिमटी है

इस शब्द में,बहुत सुंदर


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Comment by rajesh kumari on April 4, 2012 at 4:36pm

bahut bahut aabhari hoon Pradeep kumar ji

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 4, 2012 at 2:33pm

SHABASH, AADARNIYA MAHODAYA. JI, SADAR ABHIVADAN. RACHNA PADHTE PADHTE MAIN 3 SHABD KON HONGE SOCHTA RAHA. , ANT MAIN PATA CHALA SHABAS. BADHAI, MAIN AESA HI KARTA HOON. BEBAK.


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Comment by rajesh kumari on April 4, 2012 at 12:07pm

बहुत आभारी   हूँ  मनोज जी आपकी टिपण्णी से ख़ुशी मिली 

Comment by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' on April 4, 2012 at 11:37am

आदरणीय राजेश कुमारी जी..अभी अभी एक टिप्पडी का पीछा करते हुए आया तो एक सांस में समूची कविता ही पढ़ गया...अब मैं क्या कहूँ..शीर्षक पढ़ कर कुछ जादू टोने जैसा लगा लेकिन पढ़ने के बाद वस्तुस्थिति का पता चल पाया|क्षमा चाहूँगा मैं तीन वर्ण की बजाय चार वर्णों का प्रयोग करना चाहूँगा..लाजवाब|


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Comment by rajesh kumari on April 4, 2012 at 11:33am

सीमा जी बहुत आत्मतुष्टि होती है लिखने वाले को जब लगता है की कोई उसकी रचना के मूल तथ्य तक पहुच पाया लिखना सार्थक हो जाता है हार्दिक आभार .


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Comment by rajesh kumari on April 4, 2012 at 11:30am

हर्दय को अपार प्रसन्नता हुई प्राची जी प्रतिक्रिया पढ़कर 


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Comment by rajesh kumari on April 4, 2012 at 11:05am

  बहुत बहुत आभारी हूँ राकेश त्रिपाठी जी

Comment by राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' on April 4, 2012 at 10:55am

वाह! आदरणीया राजेश कुमारीजी, सादर नमस्कार, बहुत अच्छी रचना.

//किसी हतोत्साहित ,टूटते हुए 
इंसान के काँधे पर हाथ रख कर 
एक बार तो कह कर देखिये 
            शाबाश !!!  //

अद्बुत वचन, उम्दा प्रस्तुति, सादर बधाई.

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