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मैं आपसे भीख मांगता हूँ...
क्या कभी आपसे किसी ने ऐसा कहा है,
उसको ऐसा क्यूँ लगा की
आपसे भीख मांगी जाए,
उसको कैसे यह अंदाज़ा है की आपके पास भीख है,
आपके पास भीख कहाँ से आई,
आपने किस से मांगी थी
भीख.....

© AjAy Kum@r ~

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Comment

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Comment by AjAy Kumar Bohat on May 13, 2012 at 7:36pm

सभी आदरणीय कवि मित्रों का हौसला अफजाही  के लिए
शुक्रिया, आशा है आगे भी स्नेह बनाये रखेंगे....

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 18, 2012 at 10:42pm

bahut sundar arth purn baat kah gaye aap. badhai.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 15, 2012 at 5:12pm

सभी मांगते हैं भिक्षा,

कोई हरेक से तो कोई हरी से,

हम भी देते है भिक्षा

जो हमें हरी से मिला ,

अच्छी रचना अजय जी, बधाई |

Comment by Abhinav Arun on April 14, 2012 at 12:48pm

क्या कहने !! आपके इस अंदाज़े बयां पर हार्दिक बधाई !!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 14, 2012 at 4:25am

बादशाह और फ़क़ीर की कथा को याद दिला दिया आपने अजय जी.  धन्यवाद

Comment by राज लाली बटाला on April 14, 2012 at 2:34am

अच्छा लगा !! सोच है !! खूब 

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