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मोहपाश

माँ की महिमा

माँ नहीं तो न घर न गाँव है 

माँ ही ममता की छाँव है 

माँ शब्द में ममता समायी है

माँ शब्द में घुली मिठास है

माँ शब्द में मान है सम्मान है

माँ शब्द में मदिरा सी मस्ती है

माँ शब्द में मधुर उल्लास है

माँ शब्द में जादू सा सम्मोहन है

माँ शब्द में मन मयूर का नाच है

माँ शब्द मन मोहन से ऊपर है

माँ का मिलन सब सुखो का भंडार है

माँ में समाहित सारे जहां का  संसार

माँ शब्द गागर में सागर है

द्वारा-लक्ष्मण प्रसाद लड़ीवाला, जयपुर

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Comment

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 18, 2012 at 11:08pm

maan saman koi nahi. badhai.

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on April 17, 2012 at 11:17pm

माँ शब्द में मधुर उल्लास है

माँ शब्द में जादू सा सम्मोहन है

--------------------------------------------

माँ शब्द में मन मयूर का नाच है

माँ शब्द मन मोहन से ऊपर है

माँ शब्द में मदिरा सी मस्ती है 

से और अच्छा होता माँ शब्द मधु है मधुशाला है .......अमृत का प्याला है ...
भ्रमर ५ 


Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 17, 2012 at 10:23pm

आदरणीय गणेश जी बागी, नमस्कार "माँ की महिमा" का एहसास "माँ शब्द

 को ब्रह्माण्ड से भी बड़ा" कहकर गागर में सागर को आपने चरितार्थ कर दिया |
आपने जो उत्साह वर्धन किया है, उसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद |
-लक्ष्मण प्र. लडीवाला
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 17, 2012 at 10:17pm

महिमा श्री जी, नमस्कार "माँ की महिमा" का एहसास "माँ तो बस-----

माँ है" से आपने भी थोड़े से शब्दों में कराते हुए मेरा जो उत्साह वर्धन 
किया है, उसके लिए हार्दिक धन्यवाद |-लक्ष्मण प्र. लडीवाला
Comment by MAHIMA SHREE on April 16, 2012 at 9:50pm

आदरणीय लक्ष्मण जी ,

नमस्कार , क्या कहूँ माँ तो बस........................................... माँ है      .बेहद  ही सुंदर अभिवयक्ति ..बधाई स्वीकार करें  


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 16, 2012 at 9:33pm

माँ एक छोटा शब्द ....अर्थ ब्रह्मांड से भी बड़ा, बहुत ही सुन्दर रचना, बधाई लक्ष्मण प्रसाद जी |

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