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माधुर्य

(वाणी का माधुर्य)

वाणी का माधुर्य-

देता है जीवन को विस्तार 

जहाँ प्रेम है

वहां लेन-देन नहीं है

देना ही देना है

कोई व्यापार नहीं है |

.

मुस्कान 

मानव मन का दर्पण 

श्रेष्ठता का प्रमाण-पत्र

मन की निर्मलता का-

प्रतिबिम्ब 

.

आंखे :

इंसानी भांवो की झलक 

चेहरे का भांव 

.

दुःख  

सुख का साधन 

कष्टों की अनुभूति 

.

सु:ख 

दूर क्षित पर अंकित 

असंभव है टंकित 

.

जीवन :

कर्मो का प्रतिफल 

सु:ख-दुःख का अहसास 

भावी आस  

.

लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला


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Comment

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 30, 2012 at 6:12pm

SHAILENDRA KUMAR SINGH 'MRIDU' सरजी,आपका हार्दिक आभार |

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 30, 2012 at 12:37pm

आदरणीय लक्ष्मण  सर यथार्थ को परिभाषित करती क्षणिकाए... बधाई स्वीकार करें  

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 29, 2012 at 8:49pm

महिमा श्रीजी, आपका हार्दिक आभार | एक और बात -

अप मुझे सर कहकर संबोधित न करे | मै उम्र से भले ही 
बड़ा हु , पर लेखन कर्म में वरिष्ठ नहीं | 
Comment by MAHIMA SHREE on April 29, 2012 at 6:33pm

कर्मो का प्रतिफल 

सु:ख-दुःख का अहसास 

भावी आस  ...............

आदरणीय लक्ष्मण  सर , सादर नमस्कार ,

बेहद सटीक और यथार्थ को परिभाषित करती क्षणिकाए... बधाई स्वीकार करें     

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 29, 2012 at 4:17pm

     श्री पी के सिंह कुशवाहाजी, और वंदना गुप्ताजी,

प्रोत्साहन के लिए हार्दिक धन्यवाद | लेखनी में 
सुधर की द्रष्टि से आपसे सुझावों की अपेक्षा है |
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 29, 2012 at 2:09pm
कर्मो का प्रतिफल

सु:ख-दुःख का अहसास

भावी आस
bahut sundar prastuti. badhai.

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