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मैं कौन हूँ ?

अनंत आकाश या अन्तरिक्ष का मौन हूँ 

धरती का श्रृंगार हूँ पाताल का आधार हूँ 

पर्वतों  में   हूँ   शिखर  पाषाण में  भगवान  हूँ

नदियों का पाट हूँ  निर्बाध उसका बहाव हूँ 

झरने सा पतन मेरा   झर झर  आवाज  हूँ

पक्षियों का कलरव हूँ उनकी ऊँची उड़ान हूँ 

समुद्र  की  लहर  हूँ    भीतरी  ठहराव हूँ

मस्त शीतल  पवन हूँ या उठता तूफ़ान हूँ 

रंगों में रंग हूँ  फूलता वसंत  हूँ

सीमा में बंटी धरती,  सिरमोर भारत   हूँ 

रंग हूँ रूप हूँ धरती का भूप हूँ 

धनवानों का वैबभ हूँ निर्धन की भूख  हूँ

नारी की कोमलता हूँ ममता  की मूरत हूँ 

दुखियों का दर्द  हूँ   शिशु की मुस्कान  हूँ 

पावस,  ग्रीष्म  शिशिर  हूँ  ऋतुओं  में ऋतुराज हूँ

सूरज का ताप  हूँ  चांदनी की शीतलता हूँ 

पानी का बुलबुला हूँ बिछी घास पर ओस हूँ 

मंदिरों की आरती मस्जिद की आजान हूँ 

नारी की शक्ति  हूँ कवि की अभिव्यक्ति हूँ 

कल्पना से परे जो  ईशवर की भक्ति हूँ 

शब्दों में शब्द हूँ ध्वनि में निशब्द  हूँ 

आचरण में पशु  हूँ  धरती का इंसान हूँ 

प्रश्नों  में प्रश्न  हूँ  अनुत्तरित उत्तर  हूँ

खोजता हर जगह  मृग  कस्तूरी की तरह 

वो है मेरे अन्दर  फिर भी अनजान हूँ 

कैसे पहचानूँ  की मैं कौन हूँ 

इसीलिए आज मैं मौन हूँ 

 

 

 

 

 

 

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Comment by Abhinav Arun on April 28, 2012 at 12:49pm

कैसे पहचानूँ  की मैं कौन हूँ 

इसीलिए आज मैं मौन हूँ 

वाह इस काव्यगत प्रवाह पर मुग्ध हूँ प्रदीप जी हार्दिक बधाई इस सुन्दर रचना के लिए !!

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