For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मानव स्वयं सम्पूर्ण रहा है

दो चार दिनों का जीवन मेरा,

क्या पाया है  मैंने  अब तक,

मुझसे  कोई   क्या  सीखेगा,

कितनी दुनिया देखी अब तक।

खुश हूँ  तुम्हें  पता  है क्यों,

अनजान  बहुत  नादान जरा,

शायद  ठोकर  कम  खाई है,

बहुत  सहारे हैं  संघर्ष  जरा।

मैं समय नियंता  नहीं मगर,

शायद  टुकड़ों में  बँट  जाऊँ,

समय की  एक  चोट खाकर,

मैं  चूर  चूर  बिखर  जाऊँ।

मुझसे क्या  सीखेगा  मानव,

सत रज तम का नीर बहा है,

तेज का  अंश  लिए  उर में,

मानव स्वयं  सम्पूर्ण रहा है।

मानव स्वयं  सम्पूर्ण रहा है।

Views: 110

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by वीनस केसरी on May 2, 2012 at 11:37pm

मानव स्वयं  सम्पूर्ण रहा है।
...... इस एक पंक्ति में पता नहीं कैसा कटाक्ष भरा हुआ है,,, 

सुन्दर कविता


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 2, 2012 at 1:03pm

मुझसे कोई क्या सीखेगा,
कितनी दुनिया देखी अब तक.. . 

क्यों सिखाने पर तुले हैं भाई !?.. साझा कीजिये न जो अबतक कुछ देखा-सुना है. औरों के लिये वही किसी जानकारी या सीख से कम नहीं होगी.

बहरहाल,  इस बढिया प्रयास पर हार्दिक शुभकामनाएँ.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 2, 2012 at 12:55pm

niraj ji, shandaar abhivyakti. maushya ko poornta chahiye. badhai.

Comment by आशीष यादव on May 2, 2012 at 9:41am
शानदार अभिव्यक्ति।

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 2, 2012 at 9:35am

नीरज जी, अच्छी रचना, पूर्ण तो यहाँ कोई नहीं, यदि महुष्य पूर्णता को प्राप्त कर ले तो वो मनुष्य रह ही नहीं जायेगा और ईश्वर हो जायेगा | बधाई आपको इस अभिव्यक्ति पर |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय मनन जी,  आपकी ग़ज़ल पर हुआ प्रयास प्रभावी है. मतला तो देर तक बाँधे रखा.  एक बात…"
9 minutes ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"मैं आदरणीय समर साहब की बात से सहमत हूँ। हमें इसे सीखने-सिखाने का खुला मंच बना रहने देना चाहिए।…"
21 minutes ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"जी, ठीक है।"
29 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय लक्ष्मण मुसाफ़िर जी, आपकी ग़ज़ल का मतला निराला और अत्यंत प्रभावी है. दिल से मुबारक़बाद…"
30 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब, आपकी ग़ज़ल का तो क़ाफ़िया ही बदल गया है. दूसरे, इस बहर की जान गेयता है.…"
36 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब, आपकी ग़ज़ल का तो क़ाफ़िया ही बदल गया है. दूसरे, इस बहर की जान गेयता है.…"
36 minutes ago
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आप का बहुत बहुत शुक्रिया"
47 minutes ago
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आप का बहुत बहुत शुक्रिया"
48 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आदरणीय गुलशन ख़ैराबादी जी, आपकी इस ग़ज़ल का मतला बहुत प्रभावित न कर पाया. अलबत्ता ग़िरह पर मैं अवाक…"
57 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"//शाद गुलिस्तां से मेरा मंतव्य खुशनुमा और खिले हुए चमन को सहरा की तुलना में लाना था। // मेरे नज़दीक…"
57 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"अमित भाई, कमाल ! .. एक अरसे बाद आपकी किसी रचना से ग़ुज़र रहा हूँ. और क्या ही आनन्दमय अनुभूति का…"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"दोस्तो आदाब, देखने  मे आ रहा है कि अधिकतर सदस्य ओबीओ की परिपाटी भूलते जा रहे हैं,और उनकी…"
1 hour ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service