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जो इश्क कर लिया हर्फों में नजाकत आ गई

जो इश्क कर लिया हर्फों में नजाकत आ गई

यार दीवानगी से थोड़ी शरारत आ गई


ये नया दौर  है  इसमें जो लगा उनसे जिगर

चोट दिल पे लगी तो हमको मुहब्बत आ गई


बदलता रोज है आलम मगर जो बदला नहीं

साथ चलता रहा उसको तो अदावत आ गई


चार चांटे लगे वो फिर भी खडा झुकता गया

लोग कहने लगे की इसको शराफत आ गई


दर बदर ठोकरें ही खाता रहा जिसके  लिये

आज उनकी निगाहों में ही हकारत आ गई


खेलना खूब सीखा उनसे मगर आया नहीं 

तोड़ के दिल खुदी का इसमें महारत आ गई


नाम से बैठते गददी में मुफ्त की शोहरत  

बाप के नाम से बच्चों को वजारत आ गई


दीप बाज़ार में दिल औ जिस्म बिकने जो लगा

इश्क बिकने लगा उसमे भी तिजारत आ गई


====संदीप कुमार पटेल "दीप"====


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Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 23, 2012 at 10:07pm

नाम से बैठते गददी में मुफ्त की शोहरत  

बाप के नाम से बच्चों को वजारत आ गई

वाह वाह, बहुत खूब, अच्छी ग़ज़ल की प्रस्तुति, दाद कुबूल करें संदीप जी |

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 17, 2012 at 9:32am

आदरणीय नीलांश जी

आपका तहे दिल से शुक्रिया और सादर आभार
आपका ये स्नेह बनाये रखिये

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 17, 2012 at 9:31am

आदरणीया महिमा श्री जी

आपकी प्रतिक्रिया से मन प्रफुल्लित हो गया और अच्छा लिखने के लिए उत्साह बढ़ गया
आपका तहे दिल से शुक्रिया आपका सादर आभार

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 17, 2012 at 9:29am

आदरणीय बाजपेई सर , सादर वन्दे

आपका बहुत बहुत शुक्रिया आपका सादर आभार
अपना ये स्नेह और मार्गदर्शन बनाये रखिये

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 17, 2012 at 9:26am

अभिनव सर जी , सादर वन्दे
आपका बहुत बहुत आभारी हूँ सर जी जो आपने मेरी इस रचना को समय दिया और प्रतिक्रिया देकर उत्साह बढाया
ह्रदय की गहराई से आपका शुक्रिया ....................

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 17, 2012 at 9:23am

आदरणीय योगराज प्रभाकर सर जी सादर नमन
आपके आशीर्वाद से लिखना सार्थक हो गया
आपकी इस प्रतिक्रिया से मन प्रफुल्लित हो गया
मैं अपनी ओर से अथक प्रयास करूँगा और संलग्न रहूँगा
अपना प्रेम इसी तरह हम अनुजों पर बनाये रखिये

Comment by Nilansh on May 16, 2012 at 9:06pm

जो इश्क कर लिया हर्फों में नजाकत आ गई

यार दीवानगी से थोड़ी शरारत आ गई


bahut sunder sandeep ji

Comment by MAHIMA SHREE on May 16, 2012 at 8:51pm

जो इश्क कर लिया हर्फों में नजाकत आ गई

यार दीवानगी से थोड़ी शरारत आ गई


ये नया दौर  है  इसमें जो लगा उनसे जिगर

चोट दिल पे लगी तो हमको मुहब्बत आ गई......

क्या बात है , बहुत खूब ... बधाई आपको संदीप जी

 

Comment by Shayar Raj Bajpai on May 16, 2012 at 8:16pm

सुंदर एवं भाव पूर्ण कलाम जनाब..... थोडा सा शब्द संयोजन कीजिये..... आपका कहन बहुत उत्तम है....

Comment by Abhinav Arun on May 16, 2012 at 3:52pm

वाह वाह संदीप जी -

दीप बाज़ार में दिल औ जिस्म बिकने जो लगा

इश्क बिकने लगा उसमे भी तिजारत आ गई

 आपके कलाम ने मन मोह लिया हार्दिक बधाई इस शानदार रचना पर !!

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