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अरबों माल डकार के

अरबों माल डकार के राजा जी गै छूट।
जनहित में संदेश है लूट सके तो लूट।।

निकले जब वो जेल से यूँ दिखलाया रंग।
अभिवादन थे कर रहे जीत लिया ज्यों जंग।।

बाहर आकर वायु मे चुम्बन रहे उछाल।
इतने घृणीत कर्म का कोई नही मलाल।।

हर्षित चेलाराम के जमीं न पड़ते पाँव।
बेशरमी रख ताख पे खुश हो करते काँव।।

झिंगुर घुरवा से कहे "जितबे तुहीं चुनाव।
कट्टा पिस्टल साथ हैं डर जइहैं सब गाँव"।।

  • आशीष यादव

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Comment

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Comment by आशीष यादव on June 1, 2012 at 8:41am

आदरणीय डॉ. सूर्या बाली "सूरज" जी, दोहें पसन्द कर मुझे मान देने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।
उम्मीद है कि आगे की रचनाओं पर भी मुझे आप लोगों का आशीर्वाद मिलता रहेगा।

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on May 30, 2012 at 8:34am

आशीष जी बहुत सुंदर समसामयिक दोहे जो आज की ओझी राजनीति पर करारा प्रहार करते हैं। सुंदर शब्दों और छंदों में बंधी सुंदर भावना व्यक्त करने के लिए बहुत बहुत बधाई !!

Comment by आशीष यादव on May 26, 2012 at 9:10am

आदरणीय Saurabh Pandey जी, आदरणीय PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA जी, आदरणीय  AjAy Kumar Bohat जी, आदरणीय Arun Kumar Pandey 'Abhinav' जी, आदरणीय AVINASH S BAGDE जी एवँ  आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी, आप लोगों की टिप्पणियाँ हमेशा एक नवसंचार पैदा करतीं हैं। आप लोगों की अमूल्य टिप्पणियाँ मेरे लिये प्रेरणा स्रोत होती हैं।
सादर धन्यवाद

Comment by आशीष यादव on May 26, 2012 at 9:03am

मुख्य संपादक महोदय आदरणीय योगराज प्रभाकर जी, एवँ सहसंपादक महोदय आदरणीय Ganesh Jee "Bagi" ji, आप लोगों ने भी दोहे पसन्द किया, मुझे अपार हर्ष हो रहा है। बहुत-बहुत धन्यवाद।

Comment by आशीष यादव on May 26, 2012 at 8:58am

आदरेया  vandana gupta जी, एवँ आदरेया Rekha Joshi  जी आप लोगों ने मेरे दोहों को पसन्द किया श्रम सार्थक हुआ।
अपनी बहुमुल्य टिप्पणी से आप लोगों ने मान दिया।
बहुत-बहुत धन्यवाद


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 23, 2012 at 7:25pm

बहुत ही सुन्दर दोहें , आशीष जी आपकी यह रचना बहुत पसंद आई , बधाई स्वीकार करें |

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 20, 2012 at 8:16am

आशीष जी
        सादर,
              निकले जब वो जेल से  यूँ दिखलाया रंग।
        अभिवादन थे कर रहे  जीत लिया ज्यों जंग।।
बहुत खूब! राजा जंग जीते या नहीं आपने दिल अवश्य जीत लिया है. बधाई.

Comment by AVINASH S BAGDE on May 18, 2012 at 9:15pm

अरबों माल डकार के  राजा जी गै छूट।
जनहित में संदेश है  लूट सके तो लूट।।sahi chot Aashish bhai

Comment by Abhinav Arun on May 18, 2012 at 4:15pm

निकले जब वो जेल से  यूँ दिखलाया रंग।
अभिवादन थे कर रहे  जीत लिया ज्यों जंग।।

हा हा हा क्या कहने सामयिक कटाक्ष करते दोहे हार्दिक बधाई आशीष जी !!

Comment by AjAy Kumar Bohat on May 17, 2012 at 9:14pm

bahut karara vyang, badhai sweekaar karein...

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