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राज़ दिल का छुपाया बहुत है

राज़ दिल का छुपाया बहुत है
आंसुओं को सुखाया बहुत है

मै समझता था जिसको शनासा
आज वो ही पराया बहुत है

मैंने जिसको हसाया बहुत था
उसने मुझको रुलाया बहुत है

अब कोई और खेले न दिल से
ये किसी ने सताया बहुत है

कर चला है वो नाराज़ मुझको
मैंने जिसको मनाया बहुत है

उसके लफ्जों में हूँ आज भी मै
वैसे उसने भुलाया बहुत है

तेरी संजीदगी कह रही है
तू कभी मुस्कुराया बहुत है

क्या हुआ जो समर अब नहीं है
इस शजर का तो साया बहुत है

तुम "हिलाल"अपने दिल को टटोलो
कोई इसमें समाया बहुत है

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Comment

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Comment by Hilal Badayuni on October 10, 2010 at 10:28pm
shukriya deep zirvi sahab
Comment by DEEP ZIRVI on October 9, 2010 at 11:55pm
क्या हुआ जो समर अब नहीं है
इस शजर का तो साया बहुत है..waaah
Comment by Hilal Badayuni on October 9, 2010 at 9:30pm
shukriya bhai ratnesh ye sab kuch aap logo k liye hi hai mai ummed kerta hu isi tarah aap mere kalaam pe apne comments dete rahenge
Comment by Ratnesh Raman Pathak on October 9, 2010 at 9:29pm
bhai hilal jee apki ye gajal mujhe bahut achhi lagi,apke is gajal se dard bhari aaawaje aa rahi hai.thanks a lot---
ratnsh raman pathak
Comment by Hilal Badayuni on October 9, 2010 at 9:17pm
shukriya bhai preetam aur rakesh ji
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on October 9, 2010 at 9:00pm
राज़ दिल का छुपाया बहुत है
आंसुओं को सुखाया बहुत है

मै समझता था जिसको शनासा
आज वो ही पराया बहुत है
BAHUT KHUB HILAL BHAI...LAJAWAB PANKTI HAI YE......BAHUT BAHUT BADHAI IS GAZAL KE LIYE...AISEHI LIKHTE RAHEN...
Comment by Hilal Badayuni on October 9, 2010 at 10:24am
shukriya ganesh bhai baagi ji

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 8, 2010 at 9:10am
मै समझता था जिसको शनासा
आज वो ही पराया बहुत है,
वाह वाह हिलाल भाई , बहुत खूब , बढ़िया ग़ज़ल पढ़ा है आपने, किसी ने शायद ठीक ही कहा है ....................
मुझे तो अपनों ने मारा गैरों मे कहा दम था,
मेरी किस्ती वही डूबी जहाँ पानी कम था ,

बधाई हिलाल भाई इस खुबसूरत ग़ज़ल पर ,

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