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हूँ मयस्सर खोल के दिल गुफ्तगू करना

जिक्र करना यार जब भी रू-ब-रू करना
हूँ मयस्सर खोल के दिल गुफ्तगू करना

एक दर उसका बिना मांगे मिला सब कुछ
भूल बैठा हूँ मुरादो आरजू करना

है सराफत शान औ ईमान है जलवा
मौत इनकी हो नहीं क्या हाय हू करना

याद में जब हो खुदा तो पाक दिल होगा
गर नमाजे शौक हो तो क्या वजू करना

जो हवा में है बने खुशबू उड़े हर-सू
छोड़ दे अब "दीप" उसकी जुस्तजू करना

संदीप पटेल "दीप"

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Comment by Ashok Kumar Raktale on August 4, 2012 at 11:12pm

जिक्र करना यार जब भी रू-ब-रू करना
हूँ मयस्सर खोल के दिल गुफ्तगू करना
वाह! बहुत बढ़िया शायरी.बधाई स्वीकारें.

Comment by वीनस केसरी on August 4, 2012 at 1:00am

एक दर उसका बिना मांगे मिला सब कुछ
भूल बैठा हूँ मुरादो आरजू करना

वाह संदीप साहब आला दर्जे की शायरी और अशआर के लिए बधाई स्वीकारें
दुआ  करता हूँ कि आपकी यह सुन्दर पंक्तियाँ सार्थकता का रूप ग्रहण करें 
सादर

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 3, 2012 at 11:29am

संदीप भाई बेहतरीन रचना , तहे दिल से बधाई स्वीकार कीजिये.....

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on August 2, 2012 at 6:54pm

सुन्दर गजल और महीने का सक्रीय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकारें भाई संदीप जी...

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 1, 2012 at 11:47pm
प्रिय संदीप जी कमाल और धमाल करने के लिए लख लख बधाइयाँ महीने का सक्रिय सदस्य  चुने जाते रहें आप यों ही और उत्तरोत्तर प्रगति पथ पर बढ़ते रोशन करें समाज को ...
सुन्दर गजल 
रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई हमारे सभी प्रिय मित्रों को .
.प्रभु से प्रार्थना है कि ये भाई बहन का पर्व यों ही सदा सदा के लिए अमर रहे प्रेम उमड़ता रहे और बहनों की सुरक्षा के लिए हम सब के मन में जोश द्विगुणित होता रहे ...
आइये बहनों को सदा खुश रखें हंसे हंसाएं प्रेम बरसायें ...तो आनंद और आये ...
जय श्री राधे 
आप सब का 'भ्रमर'५ 
Comment by Albela Khatri on August 1, 2012 at 11:26pm

वाह वाह बहुत खूब ..........
महीने के सक्रिय सदस्य होने की बधाई
और इस ग़ज़ल के लिए अभिनन्दन !


है सराफत शान औ ईमान है जलवा
मौत इनकी हो नहीं क्या हाय हू करना

__वाह !

Comment by Ashish Srivastava on August 1, 2012 at 10:18pm

एक दर उसका बिना मांगे मिला सब कुछ bahut khub badhai sandeep ji ..........

wah wah

Comment by Rekha Joshi on August 1, 2012 at 9:32pm

याद में जब हो खुदा तो पाक दिल होगा
गर नमाजे शौक हो तो क्या वजू करना,बेहतरीन रचना सदीप जी ,बधाई 

कृपया ध्यान दे...

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