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बच्चे ने पूछा - दादी, आप भगवन को प्यारी कब होंगी ? बूढी दादी बोली-बेटा,भगवान् की पूजा करना ही अपने हाथ में है,बाकी सब भगवान पर है | बच्चे ने फिर पूछा- दादी आप "टै" कब बोंलेगी ? दादी कुछ देर विस्मय से बच्चे को गुहारती रही,फिर सोच कर बोंली- सौरभ बेटे "टै" बोलने से क्या होता है ? चल तू कहता है तो अभी ही बोल लेती हूँ -टै | इस पर सौरभ बोंला - दादी. रात को माँ पापा से कह रहा था कि आप नयी कार कब खरीदोंगे | मम्मी-पापा बात कररहे थे कि दादी के पास बहुत सारा धन है | पर जब वह "टै" बोल जायेगी तब ही अपने को उसका धन मिल सकेगा |और तब ही नयी कार खरीद कर लायेंगे | तब तक तो हमें कार लाने के लिए इन्तजार ही करना पडेगा |

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 4, 2012 at 9:29am

आदरणीय भाई सर्व श्री अम्बरीश श्रीवास्तवजी एंड डॉ. सूर्या बाली 'सूरज'जी नमस्कार |

आप दोनों का प्रमाणपत्र पाकर कहानी की सार्थकता सिद्ध हो गयी हार्दिक आभार आपका |

Comment by Er. Ambarish Srivastava on August 4, 2012 at 8:46am

आदरणीय लक्षमन जी,  आदरणीय डॉ. सूर्या बाली "सूरज" से मैं भी सहमत हूँ ...वास्तव में यह लघुकथा अत्यंत रोचक बन पड़ी है ...

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on August 3, 2012 at 10:52pm

लक्ष्मण जी  आज की मानसिकता को दरसाती यह लघु कथा बहुत ही मार्मिक और शिक्षाप्रद भी है। गागर में सागर भर दिया है आपने । बहुत बहुत मुबारकबाद !!

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"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
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