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मित्रता दिवस को समर्पित छह दोहे

सारे रिश्ते देह के, मन का केवल यार
यारी जब से हो गई , जीवन है गुलज़ार

मन ने मन से कर लिया आजीवन अनुबन्ध
तेरी मेरी मित्रता  स्नेहसिक्त सम्बन्ध

मित्र सरीखा कौन है, इस दुनिया में मर्द
बाँट सके जो दर्द को बन कर के हमदर्द

मीत बनो तो यूँ बनो, जैसे शिव और राम
इक दूजे का रात दिन, जपे निरन्तर नाम

मेरी हर शुभकामना, फले तुझे ऐ यार
यश धन बल आरोग्य से, दमके घर संसार

चाहे दुःख का रुदन हो, चाहे सुख के गीत
रहना मेरे साथ में,  हर दम मेरे मीत

-अलबेला खत्री







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Comment by Hariom Shrivastava on April 1, 2019 at 11:40pm

मित्रता के ऊपर शानदार दोहे आदरणीय खत्री जी। चतुर्थ दोहे का द्वितीय चरण-"जैसे शिव और राम"..मुझे लगता है कि इसमें 12 मात्राएँ हो गईं हैं।

Comment by Albela Khatri on August 16, 2012 at 7:27pm

आदरणीय राजेश कुमारी जी,
आपको पसन्द आये मेरे  जज़्बात..........मेरे लिए ख़ुशी की है ये बात
धन्यवाद

सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 16, 2012 at 6:42pm

मित्रता विषय पर बहुत सुन्दर दोहे रचे हैं कोई साफ़ संवेदन शील ह्रदय वाला ही ये सब लिख सकता है बहुत सुन्दर भावनाएं हैं हार्दिक आभार एवं मित्रता दिवस की बधाई 

Comment by Albela Khatri on August 16, 2012 at 4:14pm

आदरणीय प्राची सिंह जी
बहुत बहुत धन्यवाद
आपकी सराहना  ने मेरे शब्दों को मजबूती दी है

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 16, 2012 at 3:45pm
मन ने मन से कर लिया आजीवन अनुबन्ध
तेरी मेरी मित्रता  स्नेहसिक्त सम्बन्ध 
 
...............बहुत सुन्दर दोहावली आदरणीय अलबेला जी,
 
प्रभु ही आते हैं स्वयं, मित्र रूप में द्वार.
हास्य गुरु हों दार्शनिक, लिखें  मित्रता सार.
हार्दिक साधुवाद इस अनुपम कृति के लिए.सादर.
Comment by Albela Khatri on August 16, 2012 at 3:39pm

ये अच्छा हुआ कि दोनों का लाभ हुआ ..........यही तो गुणधर्म है साहित्य का कि  वह अपनी रौ में  सबको बहाता है,  सभी को बराबर हँसाता है और सभी को बराबर रुलाता है

आपको बधाई कि  आप इस रौ में बहे.........वरना आपा धापी के इस दौर में  लोग नहीं बहते  लोगों की आँखों से हालात बहते हैं

सादर


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on August 16, 2012 at 3:29pm

इस से ज्यादा खून तो मेरा बढ़ा था इतनी सुन्दर दोहावली पढ़ कर अलबेला भाई जी.

Comment by Albela Khatri on August 16, 2012 at 3:24pm

धन्यवाद आदरणीय योगराज जी,
आपने  सराहा यह दोहा........
मेरा खून बढ़ गया

सादर


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on August 16, 2012 at 1:17pm

//मीत बनो तो यूँ बनो, जैसे शिव और राम
इक दूजे का रात दिन, जपे निरन्तर नाम///

साधु साधु भाई अलबेला जी. वाह.

Comment by Albela Khatri on August 9, 2012 at 9:06am

कृतज्ञ हूँ  आद. सौरभ जी.......
सादर

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