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कही बम चले कही गोली ,

कही बम चले कही गोली ,
केहू खेले खून से होली ,
स्वर्ग में बाईठाल बापू देखे ,
हिंद में इ का हो रहल बा ,
अइसन सोचले ना रहनी ,
अइसन सोचले ना रहनी ,

खून देबा आजादी देहब ,
रहे नेता जी के नारा ,
भारत स्वर्ग से सुन्दर होखे ,
सपना रहे प्यारा ,
उहो स्वर्ग में इहे कहिअन,
अइसन सोचले ना रहनी ,
अइसन सोचले ना रहनी ,

खुद से बढ के देश से प्यार .
सहल लोग उ अत्याचार ,
सपना के साकार करेला ,
फंदा लागल फुल के हर ,
ओहू लोग के आत्मा ,
हो गइल बा परेसान ,
अइसन सोचले ना रहनी ,
अइसन सोचले ना रहनी ,

आज के नेता देश के बेचीं ,
पार्टी बाजी कर कर के ,
कहे रउरा लोग आजाद करवानी ,
देश के खातिर मर मर के ,
रवि अइसन दिन देखे के मिलल ,
मनवा भइल परेसान ,
अइसन सोचले ना रहनी ,
अइसन सोचले ना रहनी ,

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Comment

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Comment by Ratnesh Raman Pathak on April 29, 2010 at 6:09pm
गुरु जी आपने जो कविता यहाँ पोस्ट किया है वो .....एक कविता ही नहीं अपने देश की वर्तमान इस्थिति का एक कच्चा चिटठा है .....जिसमे आपने भ्रष्ट लोगो का चरित्र चित्रण भी बखूबी बेहद सराहनीय ढंग से प्रस्तुत करने की कोसिस की है ......और सफल भी हुए है.........धन्यवाद्
Comment by Admin on April 29, 2010 at 5:11pm
गुरु जी आज जो देश की स्थिति है और जो अपराध का बोल बाला है उसका दर्द आपके कविता मे स्पस्ट रूप से दिख रहा है , बहुत ही बढ़िया ये रचना है बहुत बहुत धन्यवाद इस पोस्ट के लिये ,
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on April 29, 2010 at 4:22pm
bahut badhiya kavita baa guru jee...hamesha ke tarah ek aur zordaar rachna.....

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