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बेटियां मरती नहीं (छंदमुक्‍त)

ऑनर किलिंग पर एक रचना

 

बेटियां मरती नहीं

मेरे बालों में
वही फूलोंवाली क्लिप
अभी भी लगी है
और फैली है
मेरे चेहरे पर
तुम्‍हारी वही

मीठी नजर


बस तुम्‍हारी आकृति
थोड़ी अस्‍पष्‍ट
हो गई है..........
और दिख रही है
सकते में दीदी
अपने मकड़जाले में
खुद को खोजती........

मॉं...................
मेरी तस्‍वीर के
आसपास बिखरे
गेंदे, गुलाब की पंखुरियां
और वह पॉलीथीन
जिसमें मेरी देह
पैक की गई थी
दे देना 'उसे'
ताकि पापा के
चेहरे पर
'कंटक टलने ' का इत्‍मीनान
स्‍थायित्‍व पा सके

मॉं..............................
कुछ भी तो
अप्रत्‍याशित नहीं था
सिवाय उस नीले
फूल के
जो अनायास ही
मेरी पूजा की थाली में
आ गिरा था
और नीला हो गया था
तुम्‍हारा, पापा का हरित प्रेम
साथ ही मेरी देह भी.........

तुम्‍हारे लोकाचार का काठ.......
मेरी देह से उठती लपट
में भींगकर
अब तो भारी
हो ही गया होगा........

लेकिन..............
शायद तुम भूल गई
कि बेटियां मरती नहीं
छोड़ जाती हैं
अपने पीछे
शकुंतला की परंपरा
किसी महाकवि के लिए

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Comment

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Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 14, 2012 at 11:21pm

मॉं...................
मेरी तस्‍वीर के
आसपास बिखरे
गेंदे, गुलाब की पंखुरियां
और वह पॉलीथीन
जिसमें मेरी देह
पैक की गई थी
दे देना 'उसे'
ताकि पापा के
चेहरे पर
'कंटक टलने ' का इत्‍मीनान
स्‍थायित्‍व पा सके

क्रूरता को थप्पड़ मारती लाजबाब रचना ...काश ऐसे माँ बाप न ही मिलें किसी को राजेश जी ...सुन्दर 
जय श्री राधे 
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५ 

 

Comment by Er. Ambarish Srivastava on August 14, 2012 at 10:47pm

//शायद तुम भूल गई
कि बेटियां मरती नहीं
छोड़ जाती हैं
अपने पीछे
शकुंतला की परंपरा
किसी महाकवि के लिए//

राजेश कुमार झा जी ! आपकी यह गहन रचना अंतर्मन तक को झिंझोड़ देती हैं ! गज़ब के भाव चित्रित किये हैं आपने .......साधुवाद मित्र !

Comment by राजेश 'मृदु' on August 14, 2012 at 10:24pm

प्राची जी, आभारी हूं कि आपने इतनी सुंदर टिप्‍पणी दी


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 14, 2012 at 4:15pm
गजब की गहनता है आपकी इस रचना में, क्या ही भाव दशा का जिया है इस काव्य की हर एक पंक्ति के साथ और अंत तो अद्भुत है.

हार्दिक बधाई इस अभिव्यक्ति के लिए राजेश कुमार जी
Comment by राजेश 'मृदु' on August 14, 2012 at 2:15pm

लक्ष्‍मण जी, सौरभ जी आप दोनों का हार्दिक आभार । आपकी टिप्‍पणी से बहुत बल मिला ।

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 14, 2012 at 12:25pm

मेरी तस्‍वीर केआसपास बिखरेगेंदे, गुलाब की पंखुरियां और वह पॉलीथीनजिसमें मेरी देह पैक की गई थी-  दे देना 'उसे'ताकि पापा केचेहरे पर'कंटक टलने ' का इत्‍मीनान स्‍थायित्‍व पा सके | वाह वाह भाई राजेश कुमार झा ऑनर किलिंग पर इससे बढ़िया शब्द नहीं हो सकते | हार्दिक बधाई | 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 14, 2012 at 9:15am

कि बेटियां मरती नहीं
छोड़ जाती हैं
अपने पीछे
शकुंतला की परंपरा
किसी महाकवि के लिए 

वाह !इस रचना के सभी बिम्ब सही इंगित को जीते हैं. संवेदनाओं और संभावनाओं से भरी इस रचना के लिये हृदय से धन्यवाद, भाई राजेशजी. बहुत-बहुत धन्यवाद और बधाइयाँ.

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