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हे परमपिता
ना देना कभी
इतनी नजदीकी
कि तुम्हारा प्रकाश
लगने लगे ताप
या फिर इतनी दूरी
कि रह जाए धुंध ही केवल
दृष्टिरेख में ...
 
हे तेजोमय
नर्क का डर
या स्वर्ग की लालसा
ना बने कारण
मेरी आस्‍था का

खुरचना प्रतिपल
मेरी ठसक
मेरे बुर्जुआपन को
ताकि समझ सकूं
तुम्‍‍हारी अभिव्‍यक्तियां
कर्पूरी अनुभूतियां
अपने लबादे के
तार-तार होने तक

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Comment

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Comment by Er. Ambarish Srivastava on September 12, 2012 at 3:50pm

धन्यवाद मित्र !

Comment by राजेश 'मृदु' on September 12, 2012 at 3:46pm

आदरणीय अंबरीष जी, सौरभ जी,राजेश कुमारी जी एवं रेखा जी आप सबका हार्दिक आभार रचना का संज्ञान लेने के लिए

Comment by Er. Ambarish Srivastava on September 12, 2012 at 9:38am

//

हे तेजोमय
नर्क का डर
या स्वर्ग की लालसा
ना बने कारण
मेरी आस्‍था का//
रचना में निहित सुन्दर व सार्थक भावों के लिए बधाई मित्र !

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 12, 2012 at 9:30am

अच्छी भाव-दशा के लिये बधाई.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 11, 2012 at 9:08pm

बहुत सुन्दर अनुपम भावाभिव्यक्ति बहुत बधाई आपको 

Comment by Rekha Joshi on September 11, 2012 at 6:34pm

हे तेजोमय

नर्क का डर
या स्वर्ग की लालसा
ना बने कारण
मेरी आस्‍था का,अति सुंदर अभिव्यक्ति राजेश जी ,बधाई 
Comment by राजेश 'मृदु' on September 11, 2012 at 5:46pm

आदरणीय गणेश जी एवं सीमा जी आपका हार्दिक आभार । अपना स्‍नेह बनाए रखें


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 11, 2012 at 4:08pm
हे तेजोमय
नर्क का डर
या स्वर्ग की लालसा
ना बने कारण
मेरी आस्‍था का...............इस रचना कि पंच लाइन, वाह वाह, बहुत ही खुबसूरत अभिव्यक्ति, बधाई हो राजेश कुमार झा जी |
Comment by seema agrawal on September 11, 2012 at 3:30pm

हे तेजोमय

नर्क का डर
या स्वर्ग की लालसा
ना बने कारण
मेरी आस्‍था का..........बहुत सुन्दर और सत्य बात कही 
मनोविज्ञान में शब्द होता है value internalization ........अर्थात जब किसी कर्म के प्रतिपादन के पीछे कोई reinforcement(negative or positive ie punishment or reward ) ना apply करना पड़े तभी मनाना चाहिए की वह value आत्मसात की जा चुकी है 
जब तक आस्था के कारणों को इस्श्वर के अर्थ को आत्मसात नही किया जाता ये दोनों तत्व motivational force की तरह चलते ही रहेंगे  

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