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पलकों पे टिकी शबनम को सुखा ले साथिया

धूप के जलते टुकड़े को बुला ले साथिया 

 

जुल्म ढा रही हैं मुझ पर  सेहरे की लडियां

इस  चाँद पर से बादल को हटा ले साथिया 

 

 बिछ गए फूल खुद  टूट कर  राहों में तेरी

 अब कैसे कोई  दिल को संभाले साथिया 

 

बिजली न गिर जाए तेरे दामन पे कोई 

कर दे मेरी तकदीर के हवाले साथिया 

 

देख के सुर्ख आँचल में  लहराती शम्मा 

दे देंगे जान इश्क में मतवाले साथिया 

 

यहाँ जल रहे हैं यार सब किस्मत पे मेरी 

मेंहदी वाले हाथों में छुपा ले साथिया 

******************************** 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 13, 2012 at 12:01pm

हार्दिक आभार योगी सारस्वत जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 13, 2012 at 12:00pm

हार्दिक आभार संदीप कुमार पटेल जी 

Comment by Yogi Saraswat on September 13, 2012 at 10:41am

यहाँ जल रहे हैं यार सब किस्मत पे मेरी 

मेंहदी वाले हाथों में छुपा ले साथिया

अति सुन्दर !

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on September 13, 2012 at 10:37am

वाह वाह वाह
आदरणीया राजेश कुमारी जी सादर प्रणाम
इस सुन्दर सार्थक प्रयास के लिए दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिये

Comment by Albela Khatri on September 13, 2012 at 9:26am

नमस्कार राजेश जी.........व्यस्तताएं कुछ बढ़ गई थीं...........


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 13, 2012 at 9:24am

आप इतने दिनों कहाँ गायब हो गए थे अलबेला जी --हार्दिक आभार ग़ज़ल को सराहने के लिए 

Comment by Albela Khatri on September 13, 2012 at 9:15am

वाह वाह राजेश जी........
बहुत खूब

जुल्म ढा रही हैं मुझ पर  सेहरे की लडियां

इस  चाँद पर से बादल को हटा ले साथिया

-अभिनन्दन


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 12, 2012 at 8:38pm

कुमार गौरव अजीतेंदु जी हार्दिक आभार आपको 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 12, 2012 at 8:37pm

अशोक कुमार रकतेला जी तहे दिल से शुक्रिया आपको ग़ज़ल पसंद आई 

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on September 12, 2012 at 8:08pm

आदरणीया राजेश जी......बहुत संदरता से आपने अपनी बातें कहीं..बहुत-बहुत बधाई आपको.......

कृपया ध्यान दे...

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