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निकिता की शादी हो रही थी| सभी बेहद खुश थे| सारा इंतजाम राजसी था| होता भी क्यों न? निकिता और उसका होनेवाला पति, दोनों ही बहुराष्ट्रीय कंपनियों में ऊँचे ओहदों पर थे और अच्छे घरों से आते थे| वैवाहिक कार्यक्रम के दौरान भाई के द्वारा की जानेवाली रस्मों की बारी आई| अब भाई की रस्में करे कौन? निकिता का इकलौता भाई, जो इंजीनियरिंग का छात्र था, परीक्षाएँ पड़ जाने के कारण अपनी दीदी की शादी में आ ही नहीं पाया था| लेकिन इससे कोई समस्या नहीं हुई क्योंकि राज्य के नामी उद्योगपति आर.के सिंहानिया का बेटा और निकिता का मुंहबोला भाई विक्रम सिंहानिया वहां मौजूद था अतः निकिता के माता-पिता ने झट से उसे आगे कर दिया और सबकुछ पुनः सुचारू रूप से चलने लगा|

लावा छिंटाई की रस्म चल रही थी और लोग बातें कर रहे थे - "देखो तो, बिल्कुल अपने भाई की तरह मानती है इसे"| कोई कह रहा था - "अरे पिछले साल राखी बंधाई में इसने निकिता को हीरे की घडी गिफ्ट की थी"| रस्में होती रहीं, लोग आज के युग में मुंहबोले भाई-बहन के इस प्रेम की मिसाल देते रहे| इस सबके बीच गाँव से आया हुआ निकिता का अपना बेरोजगार ममेरा भाई, जिसके घर में निकिता का बचपन बीता था, भीड़ में उपेक्षित बैठा चुपचाप एकटक से शादी में भाई द्वारा हो रही रस्मों को देख रहा था|

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Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on October 3, 2012 at 7:55am


आदरणीय अग्रज अम्बरीश जी........कहानी को सराहने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार.........कई अवसरों पर सचमुच मन ये सोचने के लिए विवश हो जाता है कि क्या आज रिश्ते प्रेम से होते हैं या स्वार्थ से.........संभवतः हर किसी को कभी न कभी ऐसा महसूस हुआ ही होगा.......इसी को दर्शाने का ये मेरा एक प्रयास है........आपकी सराहना ने उत्साह बढ़ाया है........एक बार पुनः धन्यवाद..........

Comment by Er. Ambarish Srivastava on October 3, 2012 at 7:08am

इस स्वार्थी समाज का वास्तविक चेहरा दर्शाती हुई इस बेहतरीन लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई अनुज !

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on October 3, 2012 at 6:56am

कहानी को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय रक्ताले सर............

Comment by Ashok Kumar Raktale on October 2, 2012 at 3:39pm

भौतिक युग और रिश्तों के तौल को दर्शाती सुन्दर लघुकथा. बधाई.

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on September 25, 2012 at 8:09am

मित्रवर विशाल जी.......आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.......आपको कहानी पसंद आई.........आज की अंधी भागदौड़ वाली जीवनशैली में शायद रिश्ते कहीं पीछे छूटते जा रहे हैं.......दुनिया मतलबी होती जा रही है..........इसी बात को मैंने इस कहानी के माध्यम से दिखाने की कोशिश की है......आपने सराहा..........आपका आभार......

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on September 25, 2012 at 7:57am

आदरणीया सीमा जी.......आपकी बात से मैं सहमत हूँ......दुनिया में आज भी ऐसे लोग हैं जो रिश्तों को निभाने में विश्वास रखते हैं.........जिनकी आँखों में पानी होता है.......किन्तु ऐसे भी कम नहीं जो रिश्तों को पहले हैसियत के तराजू पर तौलते हैं फिर आगे फैसला लेते हैं.......मैंने ये कहानी किसी एक घटना से आहत होकर नहीं लिखी बल्कि समाज में घट रही ऐसी अनेक घटनाओं को देखने के बाद ऐसी मतलबी मानसिकता का एक नमूना दिखाने के उद्देश्य से लिखी है........सार्थक एवं सहमतिपूर्ण प्रतिक्रिया देने के लिए आपका हार्दिक आभार.........

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on September 25, 2012 at 12:37am

भारतीय परम्पराओं के आंचल के नीचे के एक घाव को - एक दर्द को बखूबी उभारा है आपने.......बडी ही सहजता से कर गये बयान उस बेबस और लाचार दिल की बात जो बहुत से लोगों को तो दिखता ही नहीं बयान तो बहुत दूर की बात है.........!!!!

Comment by seema agrawal on September 24, 2012 at 10:23am

समाज को आइना दिखती  तस्वीर ...लेकिन साथ ही ये भी कहूंगी कि यह  सिर्फ एक पहलू है जो आपने स्वयं अनुभव किया  और आप को चुभा इसलिए शब्दों में परिवर्तित हुआ 
इसका एक विपरीत पहलू भी मैंने देखा है इसलिए मै आपसे  सहमती रखते हुए भी निराश नहीं हूँ ......शुभकामनाएँ गौरव जी 

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on September 24, 2012 at 9:37am

आदरणीया रेखा जी........कहानी को पसंद करने के लिये आपका बहुत-बहुत धन्यवाद........ये कहानी आज के मशीनी युग की मानसिकता को दर्शाने का मेरा एक प्रयास है......

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on September 24, 2012 at 9:34am

आदरणीय गुरुदेव.........बिल्कुल सटीक शब्दों में आपने इस कहानी की भावना को संतुष्ट करती प्रतिक्रिया दी है.....दुनिया आज सम्बन्ध नहीं बल्कि हैसियत देखने लगी है.....और उसी हिसाब से नये रिश्ते बनाये और पुराने तोड़े जाते हैं.....ये कहानी भी आज की इसी नयी मानसिकता को दर्शाने का एक प्रयास मात्र है.......सार्थक प्रतिक्रिया देने के लिये आभार...........

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