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मच्छर को आपका उद्देश्य भाया और वो अभी तक अपने सम्बन्धियों से अलग-थलग हम सब के बीच भ्रमण कर रहा है
जागरुक करता और हँसता हुआ हास्य
बधाई लक्ष्मण जी
जोरदार टिपण्णी के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया राजेश कुमारी जी, और हां, ये मच्छर मेरा नहीं, भाई श्री राज नवा दवीजी की डायरी में बैठा था,मुझे क्या मालूम था कि उनकी डायरी खोलते ही दुसरे को काट लेगा, मैंने उसे पापुलर करने की कहकर लेपटाप में लाया हूँ |
दवानवी हाहाहा होता है होता है अक्सर ऐसा मेरे से तो अविनाश जी के नाम का अ हट गया था लिखते हुए अब देखिये अर्थ की क्या ऐसी की तैसी हुई थी आदरणीय लक्ष्मण जी अच्छा हास्य का रसास्वादन करते हुए बदलते मौसम में स्वस्थ रहने की हिदायत भी मिली और आपका ये हष्ट पुष्ट मच्छर तो एसा लग रहा है की ना जाने कितनों का खून चूसके बैठा है और कब लेप टॉप से बाहर आकर काटने वाला है आपको बहुत बहुत बधाई इस रचना के लिए
हार्दिक धन्यवाद शालिनी कौशिक जी
उसकी भी ज़रुरत नहीं ये काम भी आप भारत के स्वास्थ्य विभाग पर छोड़ दें जो अपनी मच्छर मर दावा का छिडकाव सर्दियों में ही करवाता है कोई काम भी खुद करने की यहाँ न तो ज़रुरत है न आज्ञा.सुन्दर प्रस्तुति बधाई
मजा तो आपकी डायरी के पन्ने से आया है |रचना को पसंद करने के लिए आपको
नाम की त्रुटि ने हास्य रस में और भी ज़ायका भर दिया, मज़ा आ गया भाई साहेब!
आपका हृदय से आभार भाई लक्ष्मण जी. नबी लिखा है और उसका अर्थ आपको मेसेज में बता दिया है. सादर!
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