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हरिगीतिका से दीपावली

जब दीप जल उट्ठे हजारों,सज गयी हर बस्तियाँ/

हर द्वार हर आँगन सजा है,गज गयी हर बस्तियाँ/

उनके महल घर द्वार भी हैं,सम चमकती बिजलियाँ/

      घृत दीप जिनके द्वार पर है,सम दमकती बिजलियाँ//१//

 

इनके नगर घर द्वार रोशन, प्यार अरु सदभाव से/

इनकी  डगर  रोशन हुई है,  एकता  समभाव से/

इनके नगर में हर तरफ अब, छा रही हैं  मस्तियाँ/

      इक दीप से रोशन हजारों, गाँव घर  गलि बस्तियाँ//२//

 

कुछ दूर गम से जूझती यह,उन घरों की बस्तियां/

खुद आप जलती जिंदगी यह,उन सरों की बस्तियां/

इक दीप भी जिनको मयस्सर, दीप उत्सव पर नहीं/ 

  यह है गली बदनाम उनकी,शोषितों की बस्तिया  //३//

 

प्रज्ञा  गणपति  लक्ष्मी, पूजे  मिलकर  साथ/

विद्या  बुद्धिः   सम्पदा, उसको  शीश  नवात//

$$$$$$$$$$$$$$$$$$शुभ-दीपावली$$$$$$$$$$$$$$$

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Comment

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Comment by Ashok Kumar Raktale on November 15, 2012 at 7:43am

आदरणीय फूलसिंह जी आद. प्राची जी एवं आ. मनोज जी आप सभी का कोटिशः धन्यवाद.

Comment by manoj kumar chouhan on November 14, 2012 at 11:53am

सुंदर अतिसुंदर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 12, 2012 at 4:28pm

आदरणीय अशोक कुमार जी, 

हरिगीतिका छंद पर प्रयास रुचिकर लगा, सुन्दर भावों को शब्द मिले हैं.. हार्दिक बधाई 

Comment by PHOOL SINGH on November 12, 2012 at 1:07pm

अशोक  जी प्रणाम.......

सुंदर अतिसुंदर भावपूर्ण रचना......"सपरिवार सहित आपको शुभ दीपावली"

फूल सिंह

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