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ग़ज़ल - अब हो रहे हैं देश में बदलाव व्यापक देखिये

एक पुरानी ग़ज़ल....
शायद २००९ के अंत में या २०१० की शुरुआत में कही थी मगर ३ साल से मंज़रे आम पर आने से रह गयी...
इसको मित्रों से साझा न करने का कारण मैं खुद नहीं जान सका खैर ...
पेश -ए- खिदमत है गौर फरमाएं ............


अब हो रहे हैं देश में बदलाव व्यापक देखिये

शीशे के घर में लग रहे लोहे के फाटक देखिये

जो ढो चुके हैं इल्म की गठरी, अदब की बोरियां
वह आ रहे हैं मंच पर बन कर विदूषक देखिये

जिनके सहारे जीत ली हारी हुई सब बाजियां
उस सत्य के बदले हुए प्रारूप भ्रामक देखिये

जब आप नें रोका नहीं खुद को पतन की राह पर
तो इस गिरावट के नतीजे भी भयानक देखिये

इक उम्र जो गंदी सियासत से लड़ा, लड़ता रहा
वह पा के गद्दी खुद बना है क्रूर शासक देखिये

किसने कहा था क्या विमोचन के समय, सब याद है
पर खा रही हैं वह किताबें, कब से दीमक देखिये

जनता के सेवक थे जो कल तक, आज राजा हो गए
अब उनकी ताकत देखिये उनके समर्थक देखिये

(बाहर-ए-रजज मुसम्मन सालिम)

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Comment by वीनस केसरी on November 27, 2012 at 1:27am

shalini kaushik जी तहे दिल से ममनून हूँ

Comment by shalini kaushik on November 27, 2012 at 12:23am

जनता के सेवक थे जो कल तक, आज राजा हो गए
अब उनकी ताकत देखिये उनके समर्थक देखिये

बहुत सार्थक प्रस्तुति .आभार 

Comment by वीनस केसरी on November 26, 2012 at 11:23pm

धन्यवाद राजेश कुमारी जी
पूरी ग़ज़ल और विशेष रूप से दो अशआर को विशेष रूप से पसंद करने के लिए और अपना कीमती समय इस रचना को देने के लिए आपका आभरी हूँ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 26, 2012 at 8:27pm

जिनके सहारे जीत ली हारी हुई सब बाजियां 
उस सत्य के बदले हुए प्रारूप भ्रामक देखिये 

जब आप नें रोका नहीं खुद को पतन की राह पर
तो इस गिरावट के नतीजे भी भयानक देखिये----बहुत खूब!! हर अशआर  में व्यंग्य के आवरण में एक सन्देश छिपा है बहुत पसंद आई यह ग़ज़ल ये दो शेर तो बहुत ही ज्यादा पसंद आये दाद कबूल करें वीनस जी 

Comment by वीनस केसरी on November 26, 2012 at 5:18pm

Dr.Prachi Singh ji

haardik aabhar


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 26, 2012 at 2:20pm

बहुत सुन्दर ग़ज़ल वीनस जी, समाज के विभिन्न आयामों की हकीकत बयान करते अशआर सब एक से बढ़ कर एक हैं. हार्दिक बधाई 

Comment by वीनस केसरी on November 26, 2012 at 2:10pm

Laxman Prasad Ladiwala

शुक्रिया आदरणीय
जियादा इंतज़ार नहीं करवाऊंगा
वादा रहा आपसे ...

Comment by वीनस केसरी on November 26, 2012 at 2:10pm

Nilansh जी तहे दिल से आभार

Comment by वीनस केसरी on November 26, 2012 at 2:08pm

अजय शर्मा जी

शुक्रिया
शुक्रिया
शुक्रिया
शुक्रिया

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 26, 2012 at 10:19am

स्वागत है रहेगा इंतजार

कृपया ध्यान दे...

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