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सीप में मोती.

पिय प्रेम हृदय.

जागृत ज्योति.

************************

दुख के शूल.

गुलदस्ता जीवन.

प्रेम के  फूल.

*************************

प्रेम शरण.

तिमिर में किरण.

गुरु चरण.

**************************

अभिन्न मित्र.

सुरम्य लय ताल.

बंध पवित्र.

***************************

है ज़रुरत.

अनकहा वायदा.

इंसानियत.

**************************

खामोशी सुन.

बेसब्र मोहब्बत.

ख़्वाब तो बन.

**************************

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 3, 2012 at 8:15pm

हार्दिक आभार आ. कवी-राज बुन्देली जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 3, 2012 at 8:15pm

सादर धन्यवाद आदरणीय डॉ. सूर्या बाली जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 3, 2012 at 8:14pm

प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार आदरणीय योगराज प्रभाकर जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 3, 2012 at 8:12pm

हार्दिक आभार आदरणीय रविकर जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 3, 2012 at 8:12pm

हार्दिक आभार आ.अरुण शर्मा जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 3, 2012 at 8:12pm

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद लादीवाला जी 

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on December 3, 2012 at 8:04pm


प्रेम शरण.

तिमिर में किरण.

गुरु चरण.--- वाह बहुत उम्दा 

---

डा प्राची जी ,

सारे हाइकू हाई क्वालिटी के हैं | इतनी सुन्दर रचना के लिए बधाई 

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on December 3, 2012 at 6:36pm

सुन्दर ,,,,,,,,,हाइकू,,,,,,,,बधाई,,,,,,,,,

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on December 3, 2012 at 3:42pm

प्राची जी नमस्कार ! बहुत अच्छे  हाइकु लिखे है आपने। आपको बहुत बहुत  हार्दिक बधाई !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 3, 2012 at 2:19pm

बहुत बढ़िया हाइकु एक से बढ़कर एक बहुत बहुत बधाई 

कृपया ध्यान दे...

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