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लघु कथा - "हिम्मत"

आज सुबह से सौरभ उदास था, आज कहाँ जाएगा नौकरी के लिए, घर में किसी को पता नहीं था की उसके नौकरी छूट गयी है, माँ, पिता की दवा लानी है आज और जेब पूरी खाली, अगर सौरभ अपने नौकरी छूटने की बात बता दे,,तो शायद घर में बीमारी और बढ़ जायेगी,,,आखिर नयी चिंता का जन्म हो जाएगा...येही सोचते सोचते जाने कबतक सड़क के किनारे वो भ्रमित सा खडा रहा,,उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था..

उसके सामने ही एक वृध्ह व्यक्ति आया और एक कपड़ा विछा कर सड़क पर बैठ गया बड़े से झोले में से आलू की सब्जी जिसे वो "कचालू" का नाम दे रहा था, और कुछ कचौरियां ..उसी समय स्कूल छूटा, बच्चों ने आकर उसके पास भीड़ लगा ली, देखते देखते उसकी दूकान ख़तम और वो वृद्ध अपना सामान समेटते हुए उठ खडा हुआ,,,, सौरभ खडा खडा सोचता रहा , क्या इतना आसान है काम करना,,,आज उसे हिम्मत जुटानी ही पड़ेगी अपनी नौकरी की बात घर में बताकर , लेकिन दुःख के साथ नहीं सकारात्मक तरीके से उसे खुद का कुछ काम करना है ,,,दूसरों के तेहत खुद को बांधना नहीं चाहता,,उसके घर के बरामदे में अपनी पसंद की दूकान लगाएगा,,,घर के सामने स्कूल के बच्चों के लिए,,अपने लिए, अपने परिवार के लिए,....थोड़ी बहुत जमा पूँजी की राशि को बढ़ाना है उसे,,,अपने परिवार के उज्जवल भविष्य के लिए.

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Comment by SUMAN MISHRA on December 12, 2012 at 5:54pm

आभार श्री विजय सर और सीमा अग्रवाल दी

Comment by vijay nikore on December 12, 2012 at 5:22pm

सुमन जी,

प्रोत्साहन देती प्रांजल लघु कथा के लिए बधाई।

विजय निकोर

Comment by seema agrawal on December 12, 2012 at 3:19pm

सकारात्मकता के साथ जिस भी दिशा में बढ़ा जायेगा सफलता जरूर मिलेगी ......

अच्छा सन्देश देती लघु कथा ..बधाई सुमन जी 

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