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नर्म से अहसास बन लें

हर तरफ हैं रंग कितने 

आओ चुन लें 

 

भाव के मोती बिछे हैं

शब्द के कालीन पर 

प्रीत की सुर लहरियाँ हैं 

आस्था की बीन पर 

 

आओ ना कुछ

नर्म सेअहसास बुन लें 

 

भागते लम्हों की गीली 

गुनगुनी सी रेत पर

अल्पनायें कुछ उकेरें 

मौज के संकेत पर 

 'कल' की खातिर 'आज' से 

हम कुछ शकुन लें 

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Comment

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Comment by seema agrawal on January 31, 2013 at 3:58pm

आदरणीय विजय जी  हार्दिक आभार 

प्रिय संदीप,अरुण धन्यवाद अपनी प्रतिक्रया देने के लिए 

शुक्रिया अमितेष जी,तपन जी, गणेश जी एवं प्रदीप जी 

Comment by seema agrawal on January 31, 2013 at 12:48pm

प्रिय प्राची आपके स्नेह का  दिल से अभिनन्दन .....

आभार सौरभजी आपकी उपस्थिति ही ऊर्जा से भर देती है  :)

बहुत बहुत  धन्यवाद अशोक जी 

Comment by Ashok Kumar Raktale on January 25, 2013 at 1:47pm

सुन्दर नवगीत, भावनाओं का सुन्दर सफर. सादर बधाई स्वीकारें आद. सीमा जी.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 16, 2013 at 8:36pm

सीमाजी, सुन्दर और कोमल से इस नवगीत पर आपको हार्दिक बधाई. बहुत ही सुन्दर प्रयास हुआ है.

बार-बार बधाई.. .

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 10, 2013 at 4:23pm

आदरणीया दीदी सादर प्रणाम, सुन्दर फूलों की माला सी गुंथीं सुन्दर मनमोहक नवगीत हेतु हार्दिक बधाई.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on January 10, 2013 at 4:22pm

'कल' की खातिर 'आज' से 

हम कुछ शकुन लें 

 जरूर

सुन्दर 

बधाई 

आदरणीया सीमा जी सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 10, 2013 at 4:15pm

भाव के मोती बिछे हैं

शब्द के कालीन पर 

प्रीत की सुर लहरियाँ हैं 

आस्था की बीन पर ...................बहुत सुन्दर शब्दों की जादूगरी 

इस सुन्दर नवगीत के लिए बधाई आदरणीया सीमा जी 

Comment by Tapan Dubey on January 10, 2013 at 3:28pm
Waah waah bahut khub

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 10, 2013 at 3:10pm

भाव के मोती, अच्छे लगें, बहुत ही प्यारी रचना, बधाई हो इस खुबसूरत अभिव्यक्ति पर |

Comment by अमि तेष on January 9, 2013 at 5:30pm

बढिया ......................

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