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आदिकाल से नारी स्वयं में है पहचान,
क्यों कर अबला बनी है सर्वशक्तिमान,
दुर्गा अहिल्या शबरी सावित्री रूप भाता,
दुष्ट दलन श्रृष्टि कर्ता दुःख भंजन माता,
बहना बेटी भार्या बन परिवार में आती,
उड़ेल स्नेह कई रूपों में संस्कार जगाती,
धरती सा सीना इसका वात्सल्य की मूर्ति,
त्याग समर्पण स्नेह से करती इच्छा पूर्ति,
नाहक पुरूष पुरुषार्थ दिखाते लज्जा न आती,
न कोई और रिश्ता हो ये माता तो कहलाती|

प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा
९-१-२०१३

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on February 19, 2013 at 11:32am

धन्यवाद 

आदरणीय अशोक जी 

सादर नमस्कार 

Comment by Ashok Kumar Raktale on January 25, 2013 at 1:57pm

सुन्दर रचना आदरणीय प्रदीप जी, सही है नारी को पूरा सम्मान मिलना चाहिए.सादर.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on January 13, 2013 at 3:44pm

आदरणीया शुभ्रा जी 

सादर 

प्रोत्साहन  हेतु आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on January 13, 2013 at 3:42pm

आदरणीया अन्वेषा जी 

सादर 

प्रयास किया है. 

शायद कुछ बदलाव आये 

आभार प्रोत्साहन हेतु 

Comment by shubhra sharma on January 11, 2013 at 9:28pm

'नाहक पुरूष पुरुषार्थ दिखाते लज्जा न आती',प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा जी  सुन्दर और सटीक रचना 

......................शुभ्रा 
Comment by Anwesha Anjushree on January 11, 2013 at 7:08pm

wartman me jo ghatit hua...ya jo hota aa raha hai...durbhagya ki baat hai....asha hai mansikta me kabhi badlav aaye...achchha prayas

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on January 10, 2013 at 4:52pm

धन्यवाद आदरणीय अनन्त जी 

रचना आपको भाई. 

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 10, 2013 at 4:12pm

आदरणीय कुशवाहा सर नारियों में शक्ति, जोश और उर्जा को बढाती, नारी को समर्पित सुन्दर रचना हार्दिक बधाई

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on January 10, 2013 at 2:50pm

आदरणीय बागी जी, 

सादर 

प्रोत्साहन हेतु आभार 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 10, 2013 at 2:26pm

//बहना बेटी भार्या बन परिवार में आती,
उड़ेल स्नेह कई रूपों में संस्कार जगाती,//

बिलकुल सटीक बयानी, सच्ची सच्ची बात, अच्छी अभिव्यक्ति आदरणीय कुशवाहा जी , बधाई हो |

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