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shubhra sharma
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shubhra sharma's Page

Profile Information

Gender
Female
City State
patna
Native Place
allahabad
Profession
HOUSEWIFE
About me
I M A SIMPLE WOMAN. B.A- ALLAHABAD UNIVERSITY, M.A -KANPUR UNIVERSITY, B.ED- MAGADH UNIVERSITY, DIPLOMA IN COMMERCIAL ART- RAJARSHI TONDON UNIVERSITY

Shubhra sharma's Blog

लघुकथा -बहुरूपिया

हनुमान के रूप मे लोगों से भिक्षा माँग गुजर बसर कर रहे बहुरूपिये पर बङे आतंक वादी गिरोह के लिए काम करने वालों की नजर पङी।उनका आदमी बहुरूपिये से गणतंत्र दिवस के अवसर पर परेड स्थल पर कमंडल बम जगह जगह रखकर दहशत फैलाने के लिए सबसे उपयुक्त और सुरक्षित आदमी समझकर एकांत मे डील करने के लिए बात की।

आदमी-बाबा ! आपको केवल दस से पंद्रह जगहों पर कमंडल रखने है , बदले मे इतने पैसे मिलेंगे कि आपको रूप बदलकर भीख माँगने की जरूरत नहीं पङेगी ।

बाबा- (कुछ रूक कर) बेटा ! पेट के लिए गरीबी मे बहुरूपिया बन… Continue

Posted on January 25, 2014 at 5:23pm — 8 Comments

लघु कथा - लिहाज (शुभ्रा शर्मा 'शुभ ')

राधे श्याम जी पान की दूकान पर हाथ में सिगरेट छुपाये खड़े थे | तभी आठ -नौ साल का लड़का राजा दूकान से गुटखा खरीद खा कर चल दिया |

एक महोदय दुकानदार से -जब अठारह साल से कम उम्र के लोगों को तंबाकू पदार्थ ना देने का बोर्ड लगाये हैं फिर भी आपने क्यों दे दिया ?

दुकानदार -मुझे क्या मालूम की ये अपने लिए ले रहा है या घर के बड़ों के लिए | और यदि जान भी जाएँ कि ये खुद खायेगा तब भी मैं नहीं दूंगा तो किसी और दूकान से ले लेगा , मैं नुकसान में क्यों रहूँ ,खीं -खीं करते हुए बोला…

Continue

Posted on September 5, 2013 at 12:12pm — 8 Comments

लघुकथा - अनुष्ठान (शुभ्रा शर्मा 'शुभ ')

बहुत उपचार के बाद भी चित्रा की गोद सूनी थी |पूरा परिवार चिंतित रहता था |चित्रा यज्ञं हवन के लिए पति राजेश पर दवाब देती तो नोक-झोक हो जाती थी |राजेश को पूजा पाठ पर विश्वास नहीं था | काफी मेहनत के बाद चित्रा की माँ अपने भगवान् तुल्य गुरूजी मायाराम बाबू से मिली |गुरूजी चित्रा के कुंडली में संतान के घर में अनिष्टकारी ग्रह देख एक ग्रह शांति का ख़ास अनुष्ठान कराने के लिए उनके घर आने को राजी हो गए |चित्रा भी उत्साहित हो गुरूजी की आवभगत की सारी तैयारियाँ कर ली थी | गुरूजी और चित्रा को पूजा…

Continue

Posted on September 2, 2013 at 12:17pm — 22 Comments

कविता - आरजू



सुहानी सुबह में

खिली थी नन्ही कली

बगिया गुलजार थी

मेरी मौजूदगी से

आने जाने वाले

रोक न पाते खुद को

नाजुक थी कोमल थी

महका करती थी

माली ने सींचा था

खून पसीने से

देखा था सपना

सजोगी कभी आराध्य पर

कभी शहीदों के सीने पर

फूल भी गौरवान्वित थी

अपनी इस कली पर

कर रही थी रक्षा कांटे भी

पते ढक कर सुलाती थी

कली तो अभी कली थी

उसने खुद के लिए कुछ

सोचा भी नहीं था

लापरवाह थी भविष्य से…

Continue

Posted on August 30, 2013 at 5:30pm — 14 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 8:18am on August 15, 2013, D P Mathur said…

आदरणीया शुभ्रा जी , रचना पसंद करने के लिए आपका तहेदिल से आभार और धन्यवाद !

At 7:52am on August 13, 2013, रौशन जसवाल विक्षिप्‍त said…

आपका आभार 

At 12:49pm on January 6, 2013, अरुन 'अनन्त' said…

जन्म दिवस की ढेरों बधाई व शुभकामनायें. सादर अरुन शर्मा

At 10:59am on January 6, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 9:22am on December 30, 2012, sanjiv verma 'salil' said…

शुभ्रा हो हर भोर, सांझ हो सुफला, अपनी यही कामना.
नर-नारी सद्भाव सहित हों साथ सदा है नेक कामना..
कोई किसी पर क्यों हो भारी?, दूर हो सके मारा-मारी.
हर आपद-विदा को जीतें, 'सलिल' साथ मिल करें सामना..

At 3:52pm on December 19, 2012, अरुन 'अनन्त' said…

ओ बी ओ में आपका स्वागत है आदरणीया

 
 
 

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