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"कभी हँस भी लिया करो जी "

बस लो भाई राम का नाम ,
बन जायेंगे बिगड़े काम !!


आशिकी का बुखार चढ़ा है ,
आशिकी में करना है नाम!
भेजो ऐसी सुन्दर कन्या ,
जो पिलाए इश्क का ज़ाम!!


इधर ढूंढा,उधर ढूंढा,
हो गई सुबह से शाम !
बेबस ,लाचार सा बैठा .
छोड़कर सब अपने काम !


गर्ल्स होस्टल के चक्कर काटकर,
बन गया हूँ उनका दुश्मन!
लड़कियाँ खोज़ती रहती मुझको ,
लिए हाँथ हाकी तमाम !


गर पिट गया तो गम नहीं ,
चलो ये दर्द भी सह लूँगा !
लेकिन अंत में भेज देना ,
जो मल दे मुझको प्यार का बाम !!


बस लो भाई राम का नाम ,
बन जायेंगे बिगड़े काम !!


राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक /अप्रकाशित

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 1, 2013 at 4:43pm

हाहाहा हाहाहा 

हाहाहा हाहाहा 

गर्ल्स होस्टल के चक्कर काटकर,
बन गया हूँ उनका दुश्मन!
लड़कियाँ खोज़ती रहती मुझको ,
लिए हाँथ हाकी तमाम !

हाहाहा हाहाहा........बहुत खूब ! 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 1, 2013 at 2:14pm

गर्ल्स होस्टल के चक्कर काटकर,
बन गया हूँ उनका दुश्मन!
लड़कियाँ खोज़ती रहती मुझको ,
लिए हाँथ हाकी तमाम !

सही कहा .. . लंपटई का अलग ही मजा है.. .  ग़ज़ब !

प्रयासरत रहें

Comment by Meena Pathak on March 1, 2013 at 1:48pm

गर पिट गया तो गम नहीं ,
चलो ये दर्द भी सह लूँगा !
लेकिन अंत में भेज देना ,
जो मल दे मुझको प्यार का बाम !!



हंसा दिया आप की रचना ने .........शुभकामनाएं पाठक जी .....   

Comment by रविकर on February 27, 2013 at 4:41pm

मेहनत का फल हमेशा मीठा नहीं होता -
फिर भी कर लो-
शुभकामनाएं प्रियवर ||

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 27, 2013 at 11:00am

आशिकी का बुखार चढ़ा है ,
आशिकी में करना है नाम!
भेजो ऐसी सुन्दर कन्या ,
जो पिलाए इश्क का ज़ाम!!- शायद दिल से निकले सुन्दर भाव , बधाई शिरोमणि पाठक जी 

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